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काशी की आर्तिका ने रचा इतिहास, हासिल किया देश में चौथा स्थान

Wed, 11 May 2016 08:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा के मंगलवार को आए परिणाम में काशी की बिटिया आर्तिका शुक्ला ने देश भर में चौथा रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। रोहित नगर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके शुक्ला और लीना शुक्ला की बिटिया आर्तिका ने पहले प्रयास में ही बड़ी सफलता हासिल की है। कहा कि जीवन में सपना देखने के साथ उसके अनुरूप परिश्रम बहुत जरूरी होता है। ऐसा करने पर सफलता अवश्य मिलती है। तैयारी के लिए जरूरी नहीं कि कितने घंटे पढ़ाई की जाए लेकिन अहम यह है कि जितनी देर भी पढ़ें, गंभीरता से पढ़ाई की जाए।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
मंगलवार सुबह से ही परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रही आर्तिका को जैसे ही शाम चार बजे इस उपलब्धि की जानकारी मिली वह खुशी से झूम उठी। इसके बाद से फोन पर बधाई देने वालों के साथ ही देर शाम तक घर पर आने वालों का सिलसिला जारी रहा। एलकेजी से लेकर इंटर (वर्ष 2008) तक की पढ़ाई वाराणसी डीएलडब्ल्यू स्थित सेंट जॉस स्कूल से करने के बाद आर्तिका ने 2008 में ही दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में भी पहले ही प्रयास में 47वीं रैंक हासिल की थी। फिलहाल वह चंडीगढ़ पीजीआई के बाल रोग विभाग में बतौर डॉक्टर तैनात हैं।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
आर्तिका ने बताया कि उनका आईएएस बनने का सपना शुरू से ही था। इसके लिए वह चिकित्सा सेवा के साथ-साथ सिविल सर्विस की भी तैयारी करती रहीं। माता-पिता के साथ ही सबसे ज्यादा श्रेय गुवाहाटी में तैनात अपने बड़े भाई उत्सव शुक्ला को देते हुए आर्तिका ने कहा कि उन्होंने कभी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। वह पूर्व राष्ट्रपति मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना रोल मॉडल मानती हैं।

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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
सिविल सर्विसेज परीक्षा में देश भर में चौथा स्थान पाने वाली आर्तिका शुक्ला अपनी उपलब्धि से गदगद हैं। अमर उजाला से बातचीत में आर्तिका ने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, इसी मंत्र को ध्यान में रखकर उन्होंने परीक्षा की तैयारी की था। जो नतीजा आया, उससे संतुष्ट हूं। मां लीना शुक्ला की प्रशंसा करते हुए कहा कि परीक्षा की तैयारी के दौरान जब भी मन विचलित हुआ, मां का सहारा मिला। मां ने कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
आर्तिका ने कहा कि युवाओं में असीम ऊर्जा का भंडार है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है। इसके अभाव में बहुत से लोग लक्ष्य से भटक जाते हैं। कहा कि चिकित्सकीय सेवा के दौरान जो समाजसेवा का अनुभव मिला है, प्रशासनिक सेवा में उसका बहुत लाभ मिलेगा। बताया कि चार-पांच घटें की पढ़ाई कर उन्होंने यह सफलता हासिल की है। कहा कि समाज में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है, जो लड़कियां नहीं कर सकती हैं। आज सेना, प्रशासनिक, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्र में लड़कियां लड़कों के बराबर हैं।
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