कारगिल युद्ध के दौरान थलसेना, वायुसेना और नौसेना के अदम्य वीरता और साहस ने पाक को हर मोर्चे पर मात दी। आज यानी 26 जुलाई को कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने पर देश अपने वीर जवानों को याद कर रहा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह पहला मौका था जब इतने बड़े स्तर पर गोलीबारी हुई थी। जानिए कारगिल युद्ध के बारे में सबकुछ:
कारगिल युद्ध के दौरान सेना की आर्टिलरी (तोपखाना) ने ढाई लाख गोले, बम और रॉकेट दागे। जिससे ऊंचाइयों पर बंकरों में छिपकर बैठे लगभग 80 फीसदी दुश्मन मारे गए।
इस युद्ध में स्वीडन से खरीदी गई बोफोर्स तोपों ने अपना जौहर दिखाया। इन बोफोर्स गनों की बदौलत भारतीय सेना ने युद्ध की तस्वीर को पलटकर रख दिया।
इस युद्ध में तोपों का इतना ज्यादा प्रयोग हो रहा था कि 286 मीडियम रेजिमेंट की 18 बोफोर्स तोपें 25 दिन की फायरिंग के दौरान ही उपयोग से बाहर कर दी गई थीं। जबकि इसका जीवन काल 40 साल होती है।
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण टाइगर हिल्स पर कब्जे के दिन भारतीय आर्टिलरी ने 9000 गोले दागे। यह अपने आप में रिकॉर्ड था।
इस युद्ध में प्रतिदिन 300 तोपों से 5000 गोले दागे गए। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार इतनी मात्रा में गोलीबारी की गई थी।
भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत कारगिल युद्ध में कुल 6500 उड़ानें भरीं। जिसमें युद्धक विमान, परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर और इंटरसेप्टर प्लेन शामिल थे।
इस युद्ध में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने 1200 उड़ानें भरीं। जिसमें से 550 उड़ानों में विमानों ने बमबारी की।
इस दौरान भारतीय सेना के मिग-21, मिग-23, मिग- 25, मिग-27, मिग-29, जगुआर, मिराज-2000 और एमआई-17 हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया।
युद्ध के दौरान वायुसेना ने 6500 टन गोला-बारूद, पानी और अन्य साजोसामान को नियत जगह पहुंचाया। इसमें से 25 फीसदी उड़ाने वायुसेना के पश्चिमी कमान द्वारा की गई थी।
भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान ने अरब सागर में पाकिस्तान की जबरदस्त घेराबंदी कर रखी थी। इस दौरान कोई भी पाकिस्तानी शिप अपनी समुद्री सीमा पार नहीं कर पाया। पाकिस्तान के कराची, ग्वादर सहित कई पोर्ट पूरे युद्ध के दौरान खाली पड़े रहे।