अमर उजाला- जब पहली बार वर्दी (यूनिफार्म) पहनीं तो क्या एहसास था ?
अलंकृता सिंह- बहुत अच्छा महसूस हुआ, जिम्मेदारी महसूस हुई। पहला एक महीना ट्रेनिंग का बहुत मुश्किल था। समाज में हम लिंगभेद और विषमताएं व्याप्त हैं, आज मैं उसको बेहतर समझ पाती हूं। ट्रेनिंग के दौरान महसूस करती थी कि मुझे इतना दर्द क्यों होता है, क्यों ये काम इतना कठिन लग रहा है। जिस तरह आज हमारे समाज में लड़कियों का पालन पोषण हो रहा है, उनको खेलने-कूदने से रोका जाता है, बाहर खेलने जाने पर रोक-टोक होती है, घर में खेलने की ही नसीहत दी जाती है। मेरी भी पढ़ाई-लिखाई गर्ल्स स्कूल में हुई, वहां भी खेलकूद के अवसर सीमित थे, जिस वजह से फिजिकल ट्रेनिंग के समय दिक्कत आती है। जाहिर है ऐसे में खेलने के लिए प्रेरित जरूर करना चाहिए।