नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद वह सीधे राबड़ी देवी से मिलने उनके घर पहुंचे। अब जल्द ही राजद और कांग्रेस गठबंधन के साथ नीतीश कुमार फिर से सरकार बना सकते हैं।
बिहार में पांच साल बाद फिर से जेडीयू और भाजपा के बीच गठबंधन टूट गया है। मुख्यमंत्री आवास पर जेडीयू के सांसदों और विधायकों की बैठक में ये फैसला लिया गया। नीतीश ने अपना इस्तीफा भी सौंप दिया। जल्द ही वह आरजेडी, कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे।
आखिर अचानक बिहार की राजनीति में इतना बड़ा पलटवार कैसे हो गया? क्यों भाजपा-जेडीयू गठबंधन टूट गया? हम आपको तस्वीरों के जरिए पूरी कहानी समझाएंगे। ये भी बताएंगे कि कैसे बीते दिनों में भाजपा से नीतीश कुमार की दूरियां और लालू-तेजस्वी से नजदीकियां बढ़ती गईं?
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नीतीश कुमार भाजपा से नाराज बताए जा रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा से नाराजगी और 21 दिन में चार केंद्रीय बैठकों से दूरी
नीतीश कुमार की जदयू को लगता था कि भाजपा उनकी ही पार्टी में फूट डालने की कोशिश कर रही है। मतलब जदयू के विधायकों, सांसदों और नेताओं को तोड़कर भाजपा अकेले दम पर सरकार बना सकती है। अजय आलोक, आरसीपी सिंह समेत कई नेताओं पर भाजपा के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगा। ज्यादातर अब जदयू से बाहर हो चुके हैं।
इसके बाद खबर ये भी आई कि नीतीश कुमार ने इस बार केंद्र सरकार में जदयू कोटे से दो लोगों को मंत्री बनाने की मांग की है। जिसे भाजपा ने इंकार कर दिया। जिसके बाद से दोनों की दूरियां और बढ़ती गईं।
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अमित शाह की बैठक में नीतीश कुमार नहीं गए थे।
- फोटो : अमर उजाला
अमित शाह की बैठक में नहीं गए: 17 जुलाई के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी। राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी इस चर्चा में नीतीश नहीं पहुंचे। जबकि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की थी।
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राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति उम्मीदवारों के नामांकन में भी नहीं पहुंचे नीतीश कुमार।
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के नामांकन से दूरी : जदयू ने भले ही राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवारों का समर्थन किया, लेकिन वह उनके नामांकन में नहीं गए। जबकि एनडीए में शामिल सभी दलों के नेता द्रौपदी मुर्मू और फिर जगदीप धनखड़ के नामांकन में शामिल हुए।
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फोटो राष्ट्रपति रहे रामनाथ कोविंद के विदाई समारोह की है।
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति के विदाई समारोह में नहीं पहुंचे: 22 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विदाई समारोह में भोज आयोजित किया था। इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन नीतीश कुमार नहीं पहुंचे।
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द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : पीटीआई
नई राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण से भी दूरी : 25 जुलाई को मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का शपथ ग्रहण समारोह था। इसमें भी देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को आमंत्रित किया गया था। इस दौरान भी वह नहीं पहुंचे।
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नीति आयोग की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
नीति आयोग की बैठक से भी नदारद : पीएम मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की दिल्ली में बैठक हुई। इस बैठक में भी सीएम नीतीश कुमार नहीं शामिल हुए। इसके लिए उनकी तरफ से बयान आया कि अभी वह कोरोना से संक्रमित हैं। इस कारण वह बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। हालांकि, बैठक वाले ही दिन पटना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वह कई मंत्रियों के साथ दिखे।
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तेजस्वी और नीतीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
और ऐसे करीब आए लालू-तेजस्वी और नीतीश कुमार
सरकार में साथ होने के बावजूद एक तरफ नीतीश कुमार के रिश्ते भाजपा से खराब होते जा रहे थे, तो दूसरी तरफ राजद से अच्छे। कई मौके आए जब नीतीश कुमार राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के करीब दिखे। रिश्तों की ये नजदीकियां दोनों के बयानों से भी झलकने लगी। नीतीश कुमार तेजस्वी और उनके पिता लालू प्रसाद यादव के खिलाफ तीखे शब्द बोलना बंद कर चुके थे, वहीं तेजस्वी ने भी नीतीश पर टारगेट करने की बजाय केंद्र सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया था।
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तेज प्रताप यादव
- फोटो : अमर उजाला
अप्रैल में ही तेज प्रताप ने कर दिया था इशारा
10 अप्रैल को लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने रामनवमी पर लोगों को शुभकामनाएं दी। लिखा, रामनवमी के शुभ अवसर पर बहुत जरूरी है। इस पोस्ट के साथ एक फोटो भी थी। जिसमें लिखा था, 'एंट्री नीतीश चाचा'।
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तेजस्वी की रोजा इफ्तार पार्टी में शामिल हुए नीतीश कुमार
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फिर रोजा इफ्तार में लालू परिवार के साथ दिखे नीतीश कुमार
तेज प्रताप के एंट्री नीतीश चाचा के पोस्ट के ठीक 10 दिन बाद तेजस्वी यादव ने रोजा इफ्तार पार्टी दी। इसमें राबड़ी यादव, तेजस्वी, तेज प्रताप समेत राजद के कई नेता शामिल हुए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी बुलावा था और वो पहुंचे भी। करीब एक घंटे तक वह यहां रहे। इस दौरान नीतीश कुमार की नजदीकियां तेजस्वी, राबड़ी और तेज प्रताप से काफी देखने को मिली।
लालू से अस्पताल में मिलने पहुंचे थे नीतीश कुमार
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अस्पताल में लालू से मिलने गए नीतीश कुमार
पिछले महीने छह जुलाई को लालू प्रसाद यादव की तबियत अचानक खराब हो गई। उन्हें पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी स्थिति काफी नाजुक थी। इसकी सूचना मिलते ही नीतीश कुमार अस्पताल पहुंच गए। वहां करीब आधे घंटे तक वह लालू के साथ रहे। इसके बाद लगातार दस दिन तक हर रोज सुबह-शाम नीतीश कुमार लालू का हालचाल जानने के लिए तेजस्वी को फोन करते रहे। तेजस्वी खुद इस बात की तस्दीक कर चुके हैं।