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अफवाहें बना रही हैं कोरोनावायरस को और खतरनाक, जानिए इससे जुड़े सबसे बड़े भ्रम

Wed, 04 Mar 2020 09:23 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जी हां, कोरोनावायरस सीजनल फ्लू के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक है और शायह आपको फेस मास्क पहनने की जरूरत भी नहीं है। कोरोनावायरस से बचने के लिए जानिए क्या करना है जरूरी और क्या नहीं...
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छोटे-छोटे उपायों से खतरा कम हो सकता है - फोटो : freepik/WHO
चीन से फैला जानलेवा कोरोनावायरस पूरी दुनिया में बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है। जिस गति से यह वायरस फैल रहा है उससे कहीं ज्यादा गति से इसे लेकर भय और अफवाहें फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर इसके इलाज और लक्षणों को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां फैल रही हैं। 

इसे लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी उठ रहे हैं, जैसे कि क्या एल्कोहल जेल से कोरोनावायरस को खत्म किया जा सकता है? क्या कोरोनावायरस और मौसमी फ्लू एक ही हैं या इनमें असल अंतर क्या है? यहां हम कोरोनावायरस से संबंधित आपके सभी प्रश्नों और शंकाओं का जवाब लेकर आए हैं...

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भ्रम : एल्कोहल जेल से कोरोनावायरस खत्म नहीं होता है

किसी वायरस के आपके शरीर में पहुंचने में आपके हाथ मुख्य मार्ग की तरह काम करते हैं। इसलिए खुद को वायरस की चपेट से बचाए रखने के लिए अपने हाथों को साफ रखना एक काफी प्रभावी उपाय है। थोड़ी-थोड़ी देर पर अपने हाथों को साबुन और पानी से धोते रहिए। जहां ऐसा करना संभव नहीं हो वहां आप किसी एल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

यह सही है कि एल्कोहल जेल से कुछ वायरस खत्म नहीं होते हैं, लेकिन कोरोनावायरस की संरचना ऐसी है जिस पर एल्कोहल असरकारी साबित हो सकती है। ऐसे हैंड सैनिटाइजर जिनमें एल्कोहल 60 फीसदी से ज्यादा हो, माइक्रोब्स को खत्म करने में सबसे ज्यादा प्रभावकारी होते हैं। 
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भ्रम : कोरोनावायरस सीजनल फ्लू से ज्यादा खतरनाक नहीं है

अधिकतर लोगों को कोरोनावायरस की खास जानकारी नहीं है। कई लोग अब भी इसे सीजनल फ्लू समझ रहे हैं जबकि दोनों अलग हैं। सबसे पहले, कोरोनावायरस सीजनल फ्लू के मुकाबले ज्यादा जानलेवा है। सीजनल फ्लू में जहां पीड़ित व्यक्तियों में औसतन 0.1 फीसदी की जान जाती है वहीं, कोरोना के मामले में यह काफी ज्यादा है। 

इसके अलावा कोरोनावायरस सीजनल फ्लू के मुकाबले आसानी से फैलता है। सीजनल फ्लू से संक्रमित एक व्यक्ति औसतन 1.3 लोगों में संक्रमण फैलाता है वहीं, कोरोनावायरस से संक्रमित एक व्यक्ति औसतन 2.2 फीसदी लोगों को संक्रमित करता है। इन सब के अलावा कोरोनावायरस को और घातक बनाने वाला तथ्य यह है कि मनुष्यों में यह नया वायरस है। इससे निपटने के लिए हमारे शरीर में कोई प्राकृतिक इम्यूनिटी या वैक्सीन नहीं है। 

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भ्रम : फेस मास्क आपको वायरस से बचाएगा

सामान्य व्यक्ति के लिए थोड़ी-थोड़ी देर पर हाथ धोना कोरोनावायरस से बचने का सबसे असरकारी उपाय है। फेस मास्क खांसी और छींक की वजह से संक्रमण को रोकने का काम करते हैं। खांसी और छींक इसके संक्रमण का एक प्रमुख जरिया है लेकिन सभी मास्क बहुत छोटे कणों को फिल्टर करने में सक्षम नहीं होते हैं और वायरस हमारे शरीर में आंखों के रास्ते भी प्रवेश कर सकते हैं। असल में फेस मास्क पहनना उन्हीं लोगों के लिए जरूरी है जिनके संक्रमित लोगों के ज्यादा संपर्क में आने की ज्यादा संभावना होती है। 
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भ्रम : कोरोनावायरस केवल अधिक आयु के लोगों को संक्रमित करता है

चीन के वुहान यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में 138 कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि अधिक आयु के ऐसे लोग जो किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान हैं, उनमें इसके संक्रमित होने की आशंका ज्यादा होती है। लेकिन, युवा भी इससे संक्रमित हो सकते हैं और अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। 
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