एक अनुमान के मुताबिक, पहले दो दिनों में करीब 50 हजार से ज्यादा लोगों का इलाज किया गया। हालांकि गैस रिसाव के आठ घंटे बाद भोपाल को जहरीली गैसों के असर से मुक्त मान लिया गया था। सबसे बुरी तरह प्रभावित कारखाने के पास स्थित झुग्गी बस्ती हुई थी। इस घटना की वजह से भोपाल का नाम विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी से जुड़ गया। इस हादसे पर आज तक कोई भी सरकारी या गैर सरकारी संस्था मौत के आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सकी है।