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Amar Ujala Samvad: PAK पर क्या बोले शमी, जॉन अब्राहम ने क्यों चौंकाया और कैसे हुआ दो पूर्व सीएम का आमना-सामना?

Sun, 04 Aug 2024 08:12 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

 'अमर उजाला संवाद - उत्तराखंड' के लिए यहां अलग-अलग क्षेत्रों की जो हस्तियां जुटीं थीं। इन हस्तियों ने अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। यह दूसरा मौका था, जब देहरादून में ऐसा संवाद हुआ। यहां पढ़िए, दिनभर के संवाद का सार। 

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अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून...। रविवार का दिन यहां के लिए खास था। 'अमर उजाला संवाद - उत्तराखंड' के लिए यहां अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां जो जुटीं थीं। इन हस्तियों ने अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। यह दूसरा मौका था, जब देहरादून में ऐसा संवाद हुआ। विचारों को जानने के सिलसिले की शुरुआत एक ऐसे व्यक्तित्व से हुई, जो धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों को लोगों के मन से जोड़ना जानते हैं। ये वक्ता थे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज। फिर अध्यात्म की राह विकास से तब जुड़ गई, जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा ने विकसित भारत की बात की। 

इन दो महत्वपूर्ण सत्र के बाद अल्ट्राटेक सीमेंट के मार्केटिंग हेड अजय डांग और टाटा मोटर्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (सीवीबीयू) शुभ्रांशु सिंह ने 'देश के विकास की बात' विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि पर्यावरण की चिंताओं के बीच विकास कितना जरूरी है और दोनों के बीच संतुलन कितना महत्वपूर्ण है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार, राज्य के सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगौली और ग्राफिक एरा के प्रो-चांसलर डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने उच्च शिक्षा से जुड़े मिथकों पर चर्चा की। फिर इस्कॉन से जुड़े आध्यात्मिक वक्ता अमोघ लीला दास प्रभु आए और उन्होंने 'कामयाबी की राह' पर युवाओं को उन्हीं के अंदाज में संबोधित किया। उन्होंने सफलता का राज दिलचस्प तरीके से बताया और ईर्ष्या, द्वेष, द्वंद्व और समय प्रबंधन जैसे मुद्दों पर बात की। 

कामयाबी की राह जानने के बाद श्रोताओं ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सुना, जिन्होंने राज्य में हो रहे विकास कार्यों से जुड़े पहलुओं से रूबरू कराया। अमर उजाला के ही मंच पर उत्तराखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। कांग्रेस से हरीश रावत और भाजपा से डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने संवाद में शिरकत की और राज्य के विकास के मुद्दे पर अपने-अपने विचार रखे।

संवाद के आखिरी तीन सत्र भी बेहद खास रहे। एक सत्र में स्टार क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने विश्व कप, पाकिस्तान, सियासत और अपनी चोट पर बात की। वहीं, दीपा मलिक, मुरलीकांत पेटकर और देवेंद्र झाझरिया जैसे पैरालंपियन ने जोश, जज्बे और जुनून से भरी अपनी ऐसी कहानियां बताईं, जिन्हें सुनकर श्रोता भी भावुक हो गए। समापन अभिनेता जॉन अब्राहम के सत्र के साथ हुआ। संवाद में जुटे उनके प्रशंसकों को उम्मीद थी कि वे मॉडलिंग, बॉडी बिल्डिंग जैसे मुद्दों पर बात करेंगे, लेकिन जॉन ने चौंकाते हुए फिल्मों के चयन के पीछे की अपनी सोच, अपनी सादगीभरी जीवनशैली और सोशल मीडिया से दूरी पर बात की।

यहां पढ़िए, दिनभर के संवाद का सार...

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स्वामी गोविंद देव गिरी जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

‘जीवन का मार्ग’ सत्र से हुई संवाद कार्यक्रम की शुरुआत
संवाद कार्यक्रम की शुरुआत ‘जीवन का मार्ग’ सत्र से हुई। अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने स्वामी श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज का स्वागत किया। महाराज जी ने कहा कि भारत का निर्माण उत्तराखंड से होता है और उत्तरांड से ही भारत को प्रकाश मिला है। उन्होंने आगे कहा, ‘उत्तराखंड का विकास यहां की समस्याओं के समाधान से होगा। उत्तराखंड का कण कण तीर्थ है। प्रदेश में बाहर के घुसपैठियों का दबाव बढ़ रहा है। उत्तराखंड के युवाओं को इस बात के लिए जागरूक करना जरूरी है कि  बाहर से पढ़कर वापस उत्तराखंड लौटें और राज्य का विकास करें।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीय संस्कृति के ज्ञान के इस प्रकाश में ही हमें उत्तराखंड की समस्याओं का समाधान करना पड़ेगा। मन व्यथित हो जाता है, जब यहां के युवा पलायन करते हैं।’

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केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

उत्तराखंड को आईटी हब बनाना होगा- अजय टम्टा
कार्यक्रम का अगला सत्र 'विकसित भारत की बात' में केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा से बातचीत की गई। अजय टम्टा ने कहा, ‘उत्तराखंड में पढ़ने-लिखने पर बहुत जोर है। डॉक्टर यहां काम आते हैं, लेकिन कोई इंजीनियर बन जाता है तो उसके लिए यहां नौकरियों के उतने अवसर नहीं हैं। ऐसे युवाओं के लिए यहां अवसर बनाने होंगे। यहां आईटी हब बनाना होगा। जहां रेल, सड़क और हवाई कनेक्टविटी है, वहां पर ये हब विकसित करने होंगे। हमारी कुछ प्रतिभाएं वापस भी आई हैं। लोगों ने अपनी पढ़ाई-करियर के साथ यहां भी रोजगार के मौके देखे। होम स्टे इसका एक उदाहरण है।’ जब केंद्रीय मंत्री से सवाल किया गया कि उत्तराखंड की जमीन कैसे बचाई जा सकती है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड के भूस्वामियों के पास बड़ी जमीनें नहीं हैं। 2007 में उत्तराखंड सरकार की पहली कैबिनेट में इस पर चर्चा की गई थी। तब हमने रोक लगाई थी कि ढाई सौ वर्ग मीटर से ज्यादा भूमि बाहर के लोग नहीं खरीद सकेंगे। भविष्य का समय चुनौतीपूर्ण है। यहां के लोग भूमिविहीन न हों, इसकी चिंता करनी होगी।’ अजय टम्टा ने आगे कहा, ‘उत्तराखंड में बहुत सी संभावनाएं हैं। यहां की भौगौलिक परिस्थितियां विशेष हैं।’ 

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शुभ्राशु सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

निवेश के लिए आदर्श राज्य है उत्तराखंड- शुभ्रांशु सिंह
कार्यक्रम के अगले सत्र ‘देश के विकास की बात’ में में अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रेसिडेंट मार्केटिंग हेड अजय डांग और सीवीबीयू टाटा मोटर्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शुभ्रांशु सिंह से चर्चा की गई। शुभ्रांशु सिंह ने कहा कि उत्तराखंड निवेश के लिए आदर्श राज्य है। उन्होंने आगे कहा, ‘20 वर्ष पहले राज्य की पहचान बनना शुरू हुई। पहचान बनते देर लगती है। सकारात्मक बात यह है कि उत्तराखंड को लेकर नकारात्मक पहलू ज्यादा नहीं हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उद्योग आता है तो वह एक व्यक्ति के लिए नहीं होता। पूरा परिवेश मिलना जरूरी है। देश के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह परिवेश मिले। इसके लिए बुनियादी ढांचा जरूरी है।’ शुभ्रांशु सिंह ने कहा कि विकास होगा या नहीं, रोजगार बढ़ेगा या नहीं, यह देखना होगा। उत्तराखंड को आप पूरी तरह सील नहीं कर सकते। विकास के लिए जहां से भी पूंजी, तकनीक और लोग चाहिए, आपको उन्हें यहां लाना होगा।

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अजय डांग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

उत्तराखंड में पूंजी निर्माण सबसे महत्वपूर्ण- अजय डांग
उधर, अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रेसिडेंट मार्केटिंग हेड अजय डांग ने कहा, ‘उत्तराखंड में पूंजी निर्माण सबसे महत्वपूर्ण होगा। हमें स्थानीय उत्पाद प्रमोट करने होंगे, लेकिन इसी के साथ बाहरी निवेश आए, यह जरूरी है। यह निवेश भी निजी क्षेत्र और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आए तो पहचान तेजी से बढ़ेगी। हथकरघा के मामले में उत्तराखंड की पहचान बन सकती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘विकास के लिए जमीनें भी लगेंगी, प्राकृतिक संसाधन भी चाहिए होंगे। लोग मूल निवासी हो सकते हैं, लेकिन पूंजी कहीं की मूल निवासी नहीं होती। पूंजी जहां आए, वहां उसका स्वागत होना चाहिए और यह राज्य के लोगों को तय करना है।’ 

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अमर उजाला संवाद में शिक्षा और रोजगार पर हुई चर्चा - फोटो : Amar Ujala Graphics

‘रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट पर काम करना होगा’
इसके बाद कार्यक्रम के अगले सत्र ‘रोशन राहें’ की शुरुआत हुई। इस सत्र में शैलेश बगोली (आईएएस) सचिव उच्च शिक्षा विभाग, प्रोफेसर राजीव सदस्य सचिव एआईसीटीई, वाइस चांसलर राकेश कुमार, ग्राफिक एरा ग्रुप के साथ चर्चा की गई। शैलेश बगोली ने कहा कि हमें रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट के लिए काम करना होगा। शिक्षा के लिए यह जरूरी है कि साल में कम से कम 180 दिन पढ़ाई हो। प्रोफेसर राजीव ने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि 100 बच्चों में 28 बच्चे हायर एजुकेशन के लिए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इसको 50 प्रतिशत तक पहुंचा दिया जाए।’

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अमोघ लीला दास प्रभु - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

‘संगति आपको बना सकती है, बिगाड़ भी सकती है’
कार्यक्रम के अगले सत्र ‘कामयाबी की राह’ में आध्यात्मिक गुरु अमोघ लीला दास प्रभु ने कहा, ‘रिलेशनशिप मैनेजमेंट भी बहुत जरूरी है। हम गुच्छों में अंगूर की तरह हैं तो कीमत है। लेकिन बिखर गए तो कीमत खत्म हो जाती है। कभी-कभी आपकी जिंदगी में तनाव नहीं रहता, लेकिन फिर तनाव आता कैसा है- संगति से। संगति आपको बना सकती है, बिगाड़ भी सकती है। मौजूदा पीढ़ी में संवेदनशीलता की कमी है। वे गैजेट्स, स्मार्टफोन्स की संगत में रहते हैं, जिनमें संवेदनशीलता ही नहीं रहती। टेक्नोलॉजी खराब नहीं है। वह आपकी मालिक बनेगी तो बिगाड़ेगी, वह आपकी सेवा में रहेगी तो ठीक रहेगी।’

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पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

रेल, सड़क और परिवहन में काफी तेजी से विकास हुआ- सीएम धामी
कार्यक्रम के अगले सत्र ‘विकास की बात’ में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद रेल, सड़क और परिवहन में काफी तेजी से विकास हुआ है। हमारे पर्यटकों की संख्या में काफी तेजी आई है। अभी पिछले दिनों इन्वेस्टर ग्लोबल समिट का आयोजन किया था। इसमें हमको लगभग तीन लाख 54 हजार करोड़ रुपये के एएमयू साइन किए गए हैं। हम इसको लेकर काम कर रहे हैं, 77 हजार करोड़ की ग्राउंडिग शुरू हो गई है।’ सीएम धामी ने आगे कहा, जहां तक अग्निवीरों को आरक्षण देने की बात है, उस पर काम किया जा रहा है। जो अग्निवीर आएंगे, वो पूरी तरह से अनुशासित होंगे, उनके अंदर कौशल होगा, हर प्रकार से दक्ष होंगे। राज्य के अंदर बहुत सारे सेक्टरों में हम उनसे काम ले सकते हैं।
 

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रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

पूर्व मुख्यमंत्रियों हरीश रावत और रमेश पोखरियाल निशंक के बीच चर्चा
कार्यक्रम के अगले सत्र ‘हमारी शान उत्तराखंड’ में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों हरीश रावत और रमेश पोखरियाल निशंक के बीच चर्चा हुई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, ‘हमने शुरुआत बड़े शानदार तरीके से की लेकिन, हमने कुछ बुनियादी चीजें, जो इस राज्य के निर्माण की कारक थीं, उन कारकों को हमने जल्दी भुला दिया। हमारे राज्य के अंदर पलायन सबसे बड़ी चुनौती है। बढ़ता पलायन रोकना सभी के सामने बड़ी चुनौती है। इतने बड़े सिडकुल आने के बाद भी बेरोजगारी कम नहीं हुई।’

उत्तराखंड को एक मॉडल राज्य बनाना है- निशंक
उधर पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने कहा कि उत्तराखंड को एक मॉडल राज्य बनाना है और मुझे लगता है कि यह बंद नहीं होना चाहिए। निशंक ने कहा कि किसी भी राज्य के लिए एक रोडमैप होना चाहिए, लेकिन विभिन्न विभागों का जो रास्ता है और टारगेट है उसे निश्चित होना चाहिए। हमारे इस राज्य की संभावना क्या है? हमारा टारगेट क्या है? हमारा उस टारगेट पर पहुंचने का रास्ता क्या है? और उसमें संसाधन क्या है? यह किसी भी राज्य के लिए जरूरी है कि सरकार चाहे किसी की भी आए उसी रास्ते पर सब कुछ चलना है।

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मोहम्मद शमी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
वर्ल्ड कप में हार की टीस हमेशा दिल में रहेगी- मोहम्मद शमी
अमर उजाला संवाद 2024 कार्यक्रम के अगले सत्र ‘मैदान से शिखर तक’ में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी मोहम्मद शमी से चर्चा की गई। वर्ल्डकप भारतीय टीम की हार पर शमी ने कहा, 'जिंदगी में ऐसे पल बहुत कम आते हैं। जिनती बार ये सवाल पूछा जाता है तो दिल में एक उदासी सी हो जाती है। वो जीत का सिलसिला था, किसी के मुंह से नहीं निकला था कि इस टीम को कोई हरा सकता है। शायद यही तकदीर है। इसकी टीस हमेशा दिल में रहेगी।' 

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अमर उजाला संवाद - फोटो : Amar Ujala

पैरालंपिक खिलाड़ियों ने बताई अपने संघर्ष की कहानी
स्पोर्ट्स में शिखर पर पहुंचने की बात में भारत को पैरालंपिक खेलों में पदक दिलाने वाले देवेंद्र झाझरिया और दीपा मलिक भी शिरकत की। इसके अलावा मुरलीकांत पेटकर भी पहुंचे। अमर उजाला संवाद के 'जोश, जज्बा और जुनून' सत्र में ये अपने संघर्षों और पैरालंपिक खेलों में भारत को शीर्ष पर पहुंचाने की कहानी के बारे में बताया।

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जॉन अब्राहम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

कार्यक्रम में शामिल हुए जॉन अब्राहम
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में  मशहूर बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम भी शामिल हुए। इस दौरान अभिनेता ने अपनी जिंदगी और करियर के साथ-साथ सिनेमा के तमाम पहलुओं पर बात की। जॉन अपनी आगामी फिल्म 'वेदा' के बारे में भी बात करते नजर आए। इस फिल्म में वे अभिमन्यु की भूमिका में दिखाई देंगे। साथ ही वे फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।

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