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तस्वीरें: विकास के पायदान चढ़े, पहाड़ों की रानी शिमला ने दिए देश-दुनिया को कई सितारे

Wed, 26 Aug 2026 06:30 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

खूबसूरत वादियों और स्वच्छ आबोहवा के लिए मशहूर राजधानी शिमला ने विकास के भी कई पायदान चढ़े हैं। विभिन्न क्षेत्रों में शिमला से निकली हस्तियों ने देश-दुनिया में परचम लहराया। अमर उजाला शिमला यूनिट के स्थापना दिवस पर पेश है विकास के बढ़ते कदमों के साथ एक रिपोर्ट...
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रात के समय जगमगाती पहाड़ों की रानी शिमला(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला
स्वच्छ आबोहवा, पहाड़ों की खूबसूरती और सुकून के लम्हों के लिए दुनिया भर में पहचान बनाने वाले शिमला ने देश-दुनिया को कई नामी सितारे भी दिए हैं जो नाम चमका रहे हैं। पहाड़ों की रानी में विकास की भी नई इबारत लिखी जा रही है। अभिनय, खेल, कारोबार से लेकर राजनीति तक में शिमला से निकली प्रतिभाओं की लंबी फेहरिस्त है। सिनेमा की दुनिया में अनुपम खेर शिमला का सबसे चर्चित नाम हैं। सात मार्च 1955 को शिमला में जन्मे खेर ने डीएवी स्कूल से पढ़ाई की और बाद में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय पहुंचे। फिल्मों, रंगमंच और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अनुपम खेर को पद्मश्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। विश्व प्रसिद्ध उद्योगपति रतन नवल टाटा ने भी अपनी स्कूली पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पूरी की है। आगे की पढ़ाई के लिए यह विदेश रवाना हो गए थे। भारत की पहली महिला मंत्री व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर भी शिमला से ताल्लुक रखती थीं। समरहिल क्षेत्र में उनका घर था। इन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति और घर को एम्स व कर्मचारियों के लिए दान कर दिया था। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी सेंट एडवर्ड्स स्कूल, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक और अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई 1848 में स्थापित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, लालपानी से पढ़े हैं। प्रेम चोपड़ा जो बॉलीवुड की फिल्मों में एक प्रसिद्ध अभिनेता रहे हैं, उन्होंने भी अपनी पढ़ाई गंज बाजार स्थित एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की है।
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लेखक राजेंद्र किशन(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
लेखक राजेंद्र किशन आजादी से पहले नगर निगम में थे क्लर्क 
मुंबई के एक कवि, गीतकार और पटकथा लेखक राजेंद्र किशन ने 1934 से लेकर 1942 तक नगर निगम शिमला में क्लर्क के रूप में काम किया है। साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले विजेता रवींद्रनाथ टैगोर 1893 से लेकर 1894 तक शिमला के बालूगंज स्थित वुड फील्ड हाउस में रहते थे। प्रसिद्ध फिल्म और रंगमंच अभिनेता बलराज साहनी जो अपनी फिल्म धरती के लाल के नाम से मशहूर हुए, वह भी कुछ समय तक शिमला के चक्कर क्षेत्र में रहे हैं। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार निर्मल वर्मा का जन्म शिमला में हुआ था।
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गेयटी में पृथ्वीराज कपूर और टॉम ऑल्टर के अभिनय का जादू चला। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
गेयटी में पृथ्वीराज कपूर और टॉम ऑल्टर के अभिनय का जादू चला
पृथ्वीराज कपूर, केएल सहगल, शशि कपूर और जेनिफर केंडल ने अपने शुरुआती दौर में इस ऐतिहासिक गेयटी मंच पर कई यादगार नाटकों में अभिनय किया। नसीरुद्दीन शाह, टॉम ऑल्टर, अमरीश पुरी, प्राण, प्रेम चोपड़ा और मदन पुरी जैसे कलाकारों ने भी गेयटी थिएटर की अद्भुत अकॉस्टिक्स (ध्वनि व्यवस्था) वाले मंच पर बेहतरीन प्रस्तुतियां दी हैं। अंतरराष्ट्रीय लेखक रूडयार्ड किपलिंग 'द जंगल बुक' के विश्वप्रसिद्ध लेखक ने ब्रिटिश काल के दौरान गेयटी थिएटर के नाटकों में न केवल भाग लिया बल्कि ए स्क्रैप ऑफ पेपर नामक नाटक में खुद अभिनय भी किया था। स्काउटिंग आंदोलन के संस्थापक कर्नल बेडन पॉवेल ने भी इस रंगमंच पर प्रस्तुतियां दी थीं।

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अभिनेत्री प्रीति जिंटा। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
प्रीति और सेलिना का जन्म शिमला में हुआ 
बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री प्रीति जिंटा शिमला से हैं। कॉन्वेंट ऑफ जीजस एंड मेरी से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाली प्रीति का ननिहाल संजौली में है। अभिनेत्री सेलिना जेटली का जन्म भी शिमला में हुआ। सेलिना ने 2001 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब जीता और मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया। ब्रिटिश मूल के भारतीय लेखक रस्किन बॉन्ड ने बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ाई की है। नई पीढ़ी में प्रतिभा रांटा ने भी शिमला को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। शिमला में जन्मी प्रतिभा ने टेलीविजन से शुरुआत करने के बाद फिल्म लापता लेडीज में अपने अभिनय से खास पहचान बनाई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर-बल्लेबाज सुषमा वर्मा का जन्म सुन्नी में हुआ। रोहड़ू की रेणुका ठाकुर अब महिला भारतीय क्रिकेट टीम में तेज गेंदबाज हैं। 
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भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला
बंगा, बिपिन रावत, केपीएस गिल का भी शिमला से नाता
विश्व बैंक के वर्तमान अध्यक्ष और मास्टरकार्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय बंगा, भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल जिन्होंने आतंकवाद का खात्मा किया, ईरान में भारत के हाल ही में राजदूत विश्वेश नेगी, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता व जस्टिस संजय करोल सेंट एडवर्ड्स स्कूल से पढ़े हैं।  मोंटेक सिंह अहलूवालिया, पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी ने बिशप कॉटन स्कूल से अपनी पढ़ाई की है।
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
शिमला की धरती से निकले कई मुख्यमंत्री और नेता 
राजनीति के क्षेत्र में भी शिमला ने प्रदेश को बड़े नेता दिए हैं। दो बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे ठाकुर रामलाल का जन्म शिमला के जुब्बल के बरथाटा गांव में हुआ था। छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह का जन्म सराहन में हुआ था। बिशप कॉटन स्कूल में पढ़े वीरभद्र सिंह ने राष्ट्रीय राजनीति में भी केंद्रीय मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। छोटा शिमला स्कूल और संजौली कॉलेज में पढ़ाई के बाद सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस की महासचिव और लोकसभा सदस्य प्रियंका गांधी ने भी शिमला के छराबड़ा में अपना घर बनाया है।
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महिला कैडेट प्रिया लोरेटो स्कूल की छात्रा। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
सेना की पहली महिला कैडेट प्रिया लोरेटो स्कूल की छात्रा 
लोरेटो कॉन्वेंट तारा हॉल विद्यालय की प्रमुख पूर्व छात्राओं में विश्व प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मीरा नायर, एचएसबीसी इंडिया की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी नैना लाल किदवई, हिमाचल कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, भारतीय सेना की पहली महिला कैडेट मेजर प्रिया झिंगन शामिल हैं। 
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लॉरेंस स्कूल सनावर। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
लॉरेंस स्कूल सनावर में पढ़े हैं संजय दत्त, कैप्टन अमरिंदर सिंह
1847 में स्थापित द लॉरेंस स्कूल, सनावर एशिया के सबसे पुराने सह-शिक्षा आवासीय विद्यालयों में गिना जाता है। इस संस्थान ने राजनीति, सेना, व्यवसाय और कला जगत को अनेक बड़े नाम दिए हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उद्योगपति नेस वाडिया, अभिनेता संजय दत्त और सैफ अली खान जैसे नाम इसकी गौरवशाली विरासत का हिस्सा हैं। इधर, हमीरपुर स्थित सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा ने हजारों युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं के लिए तैयार किया है। 1978 में स्थापित यह संस्थान राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और सेना में चयन के लिए प्रदेश के युवाओं को मजबूत आधार प्रदान करता रहा है। यहां से निकले अनेक अधिकारी भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। 
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