दुखद: अंगीठी के धुएं ने बुझा दी 3 जिंदगी, मुझे मेरी बेटी का मुंह तो दिखा दो... कहकर बेहोश हो गई बुजुर्ग मां
Sat, 28 Jan 2023 01:37 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संजय वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
सार
भिवानी में ठंड से बचने के लिए घर में अंगीठी लगाई थी। अंगीठी के धुएं ने हंसती खेलते परिवार की तीन जिंदगियां बुझा दी। मृतक का ससुर बोला कि रोजाना वीडियो कॉलिंग पर बच्चों से बात होती थी, आज फोन नहीं उठाया।
बेटी, दामाद और दोहती की मौत के बाद बुजुर्ग शांति देवी के सामने से जब तीनों के शव एबुलेंस में ले जाने लगे तो वह रोते हुए बोली कि मुझे मेरी बेटी का अंतिम बार मुंह तो दिखा दो, मेरा तो सब कुछ लूट गया। यह कहने के बाद वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। परिजनों ने उसे संभाला।
दरअसल हरियाणा के भिवानी में नई बस्ती निवासी जेबीटी टीचर जितेंद्र (45), उसकी पत्नी सुशीला (42) और इकलौती बेटी हिमानी (16) का शव घर में ही बैड पर मिला। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर ठंड से बचने के चक्कर में अंगीठी के धुएं ने कैसे पलभर में हंसते खेलते छोटे से परिवार की तीन जिंदगलियां बुझा दीं। वहीं बेटी और दामाद और दोहती के चले जाने के बाद धर्मबीर ने कहा कि उसकी बेटी सुशीला और दोहती हिमानी के साथ रोजाना ही पौता-पौतियों के साथ वीडियो कॉलिंग पर बात होती थी। शुक्रवार सुबह फोन मिलाया तो कोई जवाब नहीं आया। उसे किरायेदारों से इस हादसे की जानकारी मिली।
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भिवानी में घर में मिले तीन शव।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
ग्वार फैक्टरी के समीप स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में बतौर जेबीटी शिक्षक तैनात जितेंद्र मूल रूप से महम क्षेत्र के गांव बड़ी भैणी का रहने वाला था। वह और उसकी पत्नी दोनों दिव्यांग थे और अपनी इकलौती बेटी हिमानी के साथ नई बस्ती स्थित मकान में रहते थे। जितेंद्र का सेक्टर 13 में भी खुद का मकान था। जिसमें फिलहाल किरायेदार रह रहे हैं। वहीं नई बस्ती का मकान उसने तीन साल पहले ही अपने बड़े भाई बिजेंद्र से खरीदा था।
इसके बाद वह पत्नी और बेटी के साथ यहां रहने लगा था। जितेंद्र के मकान के निचले हिस्से में दो से तीन किरायेदार भी रह रहे हैं, उन्हें इस हादसे की कोई भनक तक नहीं लगी। नीचे रह रही महिला किरायेदारनी के भाई ने बताया कि शुक्रवार सुबह आठ बजे दूध वाला आया था।
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परिजनों से जानकारी लेते पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसकी बहन ने पहले तो आवाजें लगाईं लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फिर फोन भी मिलाया मगर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दूध वाले से उनका दूध डलवा लिया मगर आठ बजे तक भी वह नहीं उठे तो फिर आसपास के लोगों को बुलाया गया। इसके बाद मामले की सूचना सब्जी मंडी पुलिस चौकी में दी। चौकी इंचार्ज मनीष वालिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर हालात देखे और फिर अंदर से बंद दरवाजा तोड़ा गया और फिर पुलिस अंदर दाखिल हुई। पुलिस भी अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई क्योंकि एक ही बैड पर तीनों मृत पड़े थे।
परिवार में बीमार का हालचाल जान रात को ही लौटे थे घर
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जांच करती पुलिस। कमरे में रखी अंगीठी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जितेंद्र अपने बड़े भाई बिजेंद्र व पत्नी और बेटी के साथ अपने गांव बड़ी भैणी में परिवार में किसी बीमार का हालचाल जानने के बाद बुधवार रात करीब आठ बजे ही घर लौटे थे। जितेंद्र का बड़ा भाई थोड़ी देर वहां रुकने के बाद रात को अपने दोस्त के यहां चला गया। वह शुक्रवार सुबह छह बजे लौटा तो उसने अंदर जाने की बजाए घर के बाहर खड़ी अपनी गाड़ी को लेकर वहां से निकल गया। पड़ोसी की गाड़ी भी उसने अपनी गाड़ी गली से निकालने के लिए हटवाई थी। इसलिए पड़ोसी भी उसके भाई के बारे में पुलिस को बता रहे थे।
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गहरी नींद में ही तोड़ दिया तीनों ने दम
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मृतकों के घर के बाहर खड़े क्षेत्रवासी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कमरे के अंदर सुलग रही अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से तीनों का दम घुट गया और गहरी नींद में ही तड़पकर तीनों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम कर रहे चिकित्सक ने भी तीनों की दम घुटने से मौत का खुलासा किया है। वहीं पुलिस ने मृतक के बड़े भाई बिजेंद्र से भी पूछताछ की है।
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हत्या या फिर चोरी का भी नहीं मिला कोई सुराग
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पुलिस को मृतकों के फोन देते
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घर के अंदर हत्या या फिर चोरी का भी कोई सुराग पुलिस को नहीं मिला है। टीचर का मकान पूरी तरह से बंद था। आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था और वो भी बंद था। हालांकि एक कमरे की बाहर की खिड़की की लोहे की सलाखें पहले से ही टूटी पड़ी था, यहां से भी किसी के अंदर आने और जाने का कोई आभास नहीं हुआ। महिला के नाक की नथ टूटकर नीचे गिरी हुई थी, जबकि तीनों के नाक से खून निकल रहा था।
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धर्मबीर बोला - दो दिन पहले तक नहीं थी घर में कोई अंगीठी
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परिवार की जानकारी देते मृतका सुशीला के पिता।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मृतक महिला सुशीला के पिता धर्मबीर ने कहा कि दो दिन पहले ही वह बेटी के पास यहां आया था। उस समय घर में कोई अंगीठी नही थी। उसका दामाद शिक्षक था, इतना तो वह भी समझता था कि अंगीठी का धुआं खतरनाक है। हमें कुछ समझ रही आ रहा है आखिर अचानक ये हादसा कैसे हो गया। कमरे में अंगीठी के अलावा एक प्लास्टिक कट्टे के अंदर स्टोर में कुछ लकड़ियां भी रखी हुई थी। जबकि रसोई सहित पूरे घर में सामान भी पूरी तरह से व्यवस्थित रखा हुआ था।
तीन भाई बहनों में जितेंद्र था छोटा
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पड़ोसियों से जानकारी लेते पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पड़ोसियों ने बताया कि शिक्षक जितेंद्र तीन भाई बहन थे। उसका बड़ा भाई बिजेंद्र अपनी पत्नी और बेटे के साथ बाहर रहता है। बिजेंद्र की पत्नी भी शिक्षक है और छोटा बेटा पढ़ाई कर रहा है। उनकी इकलौती बहन भी पटवारी लगी हुई है। वहीं जितेंद्र खुद यहां बतौर जेबीटी सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था।
मृतक शिक्षक जितेंद्र के बड़े भाई से भी पुलिस ने पूछताछ की है वहीं हर पहलु से पुलिस ने बारीकी से मामले की जांच की है। प्रारंभिक तौर पर तीनों की मौत अंगीठी की कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण दम घुटने से हुई है। पुलिस उस हर पहलु को भी खंगाल रही है, जो इस मामले से जुड़ा हो सकता है। -अजीत सिंह शेखावत, पुलिस अधीक्षक भिवानी।
मकान के स्टोर में रखी अंगीठी के लिए लकड़ियां।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंगीठी जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है। रात भर बंद कमरे में अंगीठी जलाने से व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन कम हो जाती है और नींद में ही बेहोशी छा जाती है। इस वजह से वह किसी से कोई मदद भी नहीं मांग पता है और फिर उसकी नींद में ही मौत हो जाती है। ऐसे हादसों से बचने के लिए बंद कमरे में अंगीठी या रूम हीटर का इस्तेमाल ज्यादा समय तक न करें। कमरे में रोशनदान की व्यवस्था जरूरी है। इस तरह के हादसों से बचाव के लिए लोगों को भी अंगीठी व रूम हीटर की हानियों के बारे में समझना होगा। -डॉ. यतिन गुप्ता, सीनियर फिजिसियन, नागरिक अस्पताल, भिवानी।