आंदोलन कर रहे किसानों की एक महीने से सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। ऐसे में अब किसान दिल्ली कूच करने की तैयारी कर रहे हैं। किसान नेताओं ने खुले मंच से इसका एलान करना भी शुरू कर दिया है। किसानों को ट्रैक्टर तैयार रखने के लिए कहा जा रहा है, ताकि बुलावा आते ही वह दिल्ली के लिए कूच कर सकें। माना जा रहा है कि 28 फरवरी को किसान नेता यह फैसला ले सकते हैं। वह पहले ही साफ कर चुके हैं कि अब आंदोलन में बड़ा फैसला लिया जाएगा। किसान नेताओं ने यहां तक कहा है कि इस बार एकजुटता के साथ चलना होगा, जिससे दिल्ली में बैठे लोग वहां से भागने को मजबूर हो जाएं। कृषि कानून रद्द कराने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर शुरू हुए आंदोलन को तीन महीने होने वाले हैं। किसानों व सरकार में 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो गृहमंत्री अमित शाह भी किसानों से वार्ता कर चुके हैं। इसके बावजूद कोई हल नहीं निकल सका है। गतिरोध कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है। जहां सरकार व किसानों के बीच सभी बैठकें दो महीने में हुई थीं, वहीं एक महीने से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है।
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किसान आंदोलन।
- फोटो : अमर उजाला
सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के लिए किसानों ने चक्का जाम किया तो रेल भी रोकी। उसके बाद भी सरकार का रुख नहीं बदलता देखकर किसान नेता बड़ा फैसला लेने की बात कह रहे थे। अब किसान नेताओं ने महापंचायतों में जिस तरह से किसानों को दिल्ली कूच करने के लिए तैयार रहने को कहना शुरू किया है। उसको देखते हुए माना जा रहा है कि किसान नेता दिल्ली कूच की तैयारी में जुटे हैं।
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किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
भाकियू नेता युद्धवीर सिंह ने खरखौदा में महापंचायत में कहा कि जब तक किसान दिल्ली में अपनी ताकत नहीं दिखाएगा, तब तक सरकार को उसका अहसास नहीं होता दिख रहा है। जिस दिन दिल्ली चलने का आह्वान हो, तभी हर घर से किसानों को लेकर दिल्ली चलना है। जिससे दिल्ली में बैठे लोगों को वहां से भागने के लिए मजबूर होना पड़े।
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राकेश टिकैत
- फोटो : ANI
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी कहा है कि जब बुलावा भेजा जाता है, तभी ट्रैक्टर लेकर दिल्ली कूच के लिए पहुंच जाए। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जिस तरह से किसान अभी तक एकजुट रहे है, उनको आगे भी एकजुटता दिखानी होगी।
28 फरवरी तक सरकार का रुख देखकर ले सकते है फैसला
जिस तरह से दिल्ली कूच की तैयारी की जा रही है। उसको देखते हुए माना जा रहा है कि 28 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद इस पर फैसला लिया जा सकता है। उससे पहले तक सरकार का रुख देखा जा रहा है और सरकार का रुख नहीं बदलता है तो संयुक्त किसान मोर्चा इसकी तारीख तय कर सकता है। इसके लिए मोर्चा के सभी संगठनों के नेताओं की सहमति लेने में लगे है और सभी की सहमति बन जाती है तो किसान दिल्ली कूच का फैसला लेकर बुलावा भेजना शुरू कर देंगे।