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मिड-डे मील की सच्चाई: भूखे पेट स्कूल से लौट रहे विद्यार्थी, तीसरी रोटी मांगने पर मिलती है डांट

Sun, 15 May 2022 02:54 AM IST
भूपेंद्र सिंह अनुपमा जाखड़, संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)

सार

फ्लेवर्ड दूध, कुकिंग लागत, सब्जी और मिर्च मसालों का भी बजट रुका हुआ है। गैस सिलिंडर न मिलने से चूल्हे पर खाना बन रहा है। इससे स्कूल कैंपस धुआं धुआं होता है। 
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ईंटों से बने चुल्हे पर मिड डे मील बनाती वर्कर। बनाए गए बच्चों के लिए चावल। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल की प्राइमरी विंग की कक्षा में खाना खाते विद्यार्थी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिक्षा विभाग का दावा है कि राजकीय स्कूलों के 8वीं तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील के तहत स्कूल में खाना मिलेगा। पौष्टिक खाने के साथ-साथ फ्लेवर्ड दूध की भी योजना है। लेकिन कड़वी सच्चाई ये है कि पिछले दो माह से व्यवस्था बेपटरी हो गई है। इन दिनों दो के बाद तीसरी रोटी मांगने पर विद्यार्थियों को डांट मिलती है। दूध भी नहीं मिल रहा। इसका मुख्य कारण ये है कि दो माह से स्कूलों को रसोई संचालन, मिर्च मसाले, खाना बनाने के लिए गैस सिलिंडर, सब्जी के लिए मिलने वाला बजट रुक गया है। हरियाणा के सिरसा जिले के 700 से ज्यादा राजकीय स्कूलों के करीब एक लाख विद्यार्थी भूखे पेट स्कूल से लौट रहे हैं।

जिले में 724 राजकीय विद्यालयों में शिक्षा विभाग की ओर से मिड-डे मील की व्यवस्था की गई है। इनमें करीब एक लाख विद्यार्थियों के लिए खाना तैयार किया जाता है। नियम है कि गेहूं और चावल का स्टॉक विभाग की ओर से भेजा जाएगा, जबकि खाना तैयार करने के लिए गैस सिलिंडर की लागत, मिर्च मसाले, सब्जी और अन्य खर्चों के लिए विभाग बजट देता है।
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ईंटों से बने चुल्हे पर मिड डे मील बनाती वर्कर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फ्लेवर्ड दूध का स्टॉक भी विभाग ही उपलब्ध करवाएगा। हालांकि स्कूलों को गेहूं और चावल का स्टॉक मिल चुका है, लेकिन पिछले दो माह से अन्य सभी बजट पर रोक लगी है। ऐसे में व्यवस्था पटरी से उतर गई है। स्कूलों में कार्यरत स्टाफ सदस्यों को अपने स्तर पर खर्चों की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

इसलिए सीमित खाना विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के विद्यार्थी राजू, राकेश कुमार, सोनम, हीमा बताते हैं कि केवल दो रोटी दी जाती है और तीसरी मांगने पर डांट मिलती है।
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बर्तनों में मुंह मारती गाय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जुगाड़ के सहारे चल रहा रही रसोई, बेसहारा पशुओं की स्कूल में एंट्री
शिक्षा विभाग की ओर से बजट न मिलने के कारण स्कूल स्टाफ अपने स्तर पर प्रबंधन कर रहे हैं। सब्जी, मसाले और अन्य सामान अपने स्तर पर खरीदकर ला रहे हैं। गैस सिलिंडर नहीं मिलने से चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है। इससे पूरा दिन स्कूल में धुआं रहता है। इसके अलावा शहर के राजकीय मॉडल सांस्कृतिक स्कूल में बेसहारा पशु भी घूमते हुए नजर आते हैं। जूठे बर्तन में पशु मुंह मारते हैं। दूध न मिलने से विद्यार्थी खीर को भी तरस रहे हैं।

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बच्चों के लिए बनाए गए चावल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस प्रकार से दिया जाता है बच्चों को खाना
1. कुकिंग कोस्ट, प्रति विद्यार्थी अनुसार
  •  प्राइमरी    4.97 रुपये
  •  अपर प्राइमरी    7. 45 रुपये
  •  फ्लेवर्ड मिल्क    260 ग्राम प्रति विद्यार्थी
2. गेहू व चावल  
  •  प्राइमरी    100 ग्राम 
  •  अपर प्राइमरी    150 ग्राम 
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राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल की प्राइमरी विंग की कक्षा में खाना खाते विद्यार्थी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन नये आदेशों के कारण अटका बजट
निदेशालय की ओर से मिड डे मील के लिए नए आदेश आए थे। इनके अनुसार अब गेहूं, चावल के अलावा अन्य सभी प्रकार का राशन, मसाले, मौसमी सब्जियां, खीर के लिए दूध, गैस सिलिंडर की खरीद किसी विक्रेता के जरिये की जाएगी। विभाग स्कूल के खातों में कोई राशि देने की बजाय सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से ही सीधे विक्रेता के खाते में भुगतान करेगा। स्कूल अपनी तरफ से बीईओ को विक्रेता को सत्यापित करेगा और अंत में डीईओ स्तर पर अपडेट किया जाएगा। जिसके बाद विक्रेता के खाते में भुगतान होगा। 
 
मिड-डे मील के तहत विद्यार्थियों को दो रोटी ही दी जा रही है। चूल्हे पर खाना इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि अभी तक स्कूलों में कुकिंग कोस्ट नहीं पहुंची है। ऐसे में स्कूल संचालक कब तक अपने तरफ से खर्चा करेगा। - राजेंद्र कुमार, मिड डे मील इंचार्ज, प्राइमरी स्कूल, अनाज मंडी।
 
स्कूलों से कुकिंग कोस्ट के बिल मांगे गए है। बिल आते ही राशि दे दी जाएगी। वहीं सोमवार को फ्लेवर्ड मिल्क भी स्कूलों में पहुंचा दिया जाएगा।  - संजय मोंगा,  नोडल अधिकारी, मिड डे मील, सिरसा।
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