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नहीं रहे अभिनेता दरियाव मलिक: 'खुंडा' के निधन से आहत 'रुंडा' बोले- चार दिन पहले ही बात हुई थी, तब भी चाचा मजाक कर रहे थे

Fri, 22 Apr 2022 02:55 AM IST
भूपेंद्र सिंह विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूराे, रोहतक (हरियाणा)

सार

हरियाणवी फिल्म चंद्रावल के हास्य कलाकार दरियाव सिंह मलिक उर्फ खुंडा के निधन से नसीब सिंह कुंडू उर्फ रुंडा आहत हैं। उन्होंने कहा कि चार दिन पहले ही बात हुई थी, तब भी चाचा मजाक कर रहे थे।
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नसीब सिंह कुंडू और दरियाव सिंह मलिक। - फोटो : अमर उजाला
असां हुण टुर जाना दिन रैण गए थोड़े.. यह कह कर चाचा हंसने लगे। चार दिन पहले की ही बात है। वे बीमार थे। अस्पताल में भर्ती होने पर भी मजाक कर रहे थे। रुंडे खुंडे का जोड़ा बिछड़ गया। चंद्रावल हमारी सुपरहिट फिल्म थी। इसने हमें सब कुछ दिया। नाम, पहचान और पिता तुल्य सुलझे हुए कलाकार के रूप में दरियाव सिंह मलिक बेहतरीन दोस्त। उन्हें कभी भूल नहीं पाऊंगा। उनके जाने से मेरा एक बाजू टूट सा गया है। यह कहना है हरियाणवी फिल्म चंद्रावल के हास्य कलाकार नसीब सिंह कुंडू उर्फ रुंडा का। वे अपने साथी कलाकार दरियाव सिंह मलिक उर्फ खुंडा के निधन के बाद अमर उजाला से विशेष बातचीत में उनके संस्मरण साझा कर रहे थे। 

शहर की कबीर कॉलोनी पीर वाली गली निवासी नसीब सिंह कुंडू उर्फ रुंडा ने कहा कि खबर सुन कर दुख हुआ। मैं भी खुंडा की तरह पैरालाज हूं। अभी चार दिन पहले उनसे फोन पर बातचीत हुई थी। उन्हें प्यार से चाचा कहता था। वे उम्र में मुझसे करीब 15 साल बड़े थे।
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दरियाव सिंह मलिक। - फोटो : फाइल
अस्पताल में भर्ती होकर भी वे मजाक कर रहे थे। वे अच्छे कलाकार होने के साथ बेहतर इंसान थे। अपने साथियों को साथ लेकर चलते थे। मुझे साथ लेकर चले। आगे बढ़ाया। हर कदम पर बच्चों की तरह समझाया। 
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दरियाव सिंह मलिक को सम्मानित करते पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अबुल कलाम। - फोटो : फाइल
अच्छे ड्रामा कलाकार थे दरियाव सिंह 
हम दोनों लोकसंपर्क विभाग में मिले थे। दोनों ही विभाग के कर्मचारी थे। दरियाव सिंह मेरे वरिष्ठ थे। वे विभाग में ड्रामा इंस्पेक्टर थे। मैं बाद में आकर उनसे आगे निकल गया। क्षेत्रीय प्रचार सहायक बना। हम ड्रामा कलाकार थे। साथ में काम करते थे। विभाग में साथियों ने हमें हाजिर जवाबी के मुकाबले में आमने-सामने किया था। उनकी हाजिर जवाबी बेहद शानदार थी। यही वजह रही कि फिल्म में भी हमारी जोड़ी हिट रही। मंच से ही हमारा परिवार समान रिश्ता बना। 

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पानीपत के गांव उग्राखेड़ी में प्रशासन की ओर से एडीसी ने दरियाव सिंह मलिक को अर्पित की श्रद्धांजलि। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रुंडा-खुंडा की नोक झोंक का सपना रह गया अधूरा 
सोनू कुंडू ने कहा कि पिता नसीब सिंह की चार दिन पहले अंकल दरियाव सिंह से बात हुई थी। इस दौरान उन्होंने एक इच्छा जाहिर की थी। यह इच्छा हम दोनों की एक नोक-झोंक को मीडिया के सामने रिकॉर्ड कराना चाहते थे। उनका यह सपना अधूरा रह गया। यह एक यादगार रह जाती। बातचीत में पिताजी ने कहा कि मेरे भी पैरों में दर्द रहता है। इस पर अंकल ने अपने मजाकिया स्वभाव में कहा कि पैर कटवा ले। ये दोबारा फूट (उग) आएंगे। यह सुनते ही मेरे पिता जोर से हंस पड़े।
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हास्य कलाकर दरियाव सिंह मलिक के साथ राघवेंद्र मलिक। - फोटो : अमर उजाला
सांस्कृतिक समारोह में रहते थे निर्णायक 
प्रेमनगर निवासी हरियाणवी फिल्म कलाकार रघुविंद्र मलिक ने बताया कि दरियाव सिंह उर्फ खुंडा साथ छोड़ गया। यह सुन कर बहुत दुख हुआ। वे 83 वर्ष के थे। हमने हरियाणवी फिल्मों में साथ काम किया है। वर्ष 1986 में फूलबदन में मैं खलनायक था। वह मजाकिया किरदार में रहा। वे अच्छे सहयोगी, हंसमुख थे। सांस्कृतिक समारोह में वे निर्णायक मंडल टीम में शामिल होते थे। उनके साथ वर्ष 2015 में यश चोपड़ा की निर्देशित फिल्म मेरे डैड की मारुति में साथ काम किया। बडे़ साहब-छोटे साहब के किरदार में पिता-पुत्र बने थे। उनका निधन हरियाणवी फिल्म जगत ही नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी अपूर्णीय क्षति है।
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