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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा: बोले-'द कश्मीर फाइल्स’ देखी नहीं है, लेकिन रिएक्शन सुनकर खुश नहीं हूं'

Fri, 25 Mar 2022 02:07 AM IST
भूपेंद्र सिंह विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शूटिंग में लगातार व्यस्त हूं। इसलिए ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म अभी देख नहीं पाया हूं। जितने रिएक्शन सुनने को मिले हैं, उससे मैं खुश नहीं हूं। कोई भी फिल्म लड़ाई नहीं कराती है। अब या तो फिल्म देखने वालों की समस्या है कि वे गलत समझ रहे हैं या फिर फिल्म में कोई समस्या हो सकती है। फिल्म देखने के बाद इस बारे में बोलूंगा। इतना जरूर कहूंगा कि कोई भी फिल्म या कला ऐसी नहीं होनी चाहिए जो नफरत फैलाए। यह तो खुश होने की बात है कि यदि किसी ने फिल्म बनाकर सच्चाई दिखाई है तो उसे सराहना चाहिए। यह कहना है अभिनेता यशपाल शर्मा का। वे गुरुवार को हरियाणा के रोहतक में अमर उजाला कार्यालय में विश्व थियेटर दिवस के उपलक्ष्य में अपने विचार साझा कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने न्यूज रूम व प्रेस का मुआयना किया। 
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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा के साथ हरियाणावी फिल्मों से जुड़े कलाकार। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि फिल्म को लेकर विवाद नहीं करना चाहिए। एक आदमी ने एक पक्ष उठाया है तो दूसरा अपना पक्ष दिखाए। उसे भी सपोर्ट किया जाएगा। विवेक अग्निहोत्री ने नफरत फैलाने का काम किया है, ऐसा नहीं है। उनके साथ काम किया है। उन्होंने अपनी बात कही है। लोगों का रिएक्शन है कि फिल्म में दूसरा पक्ष नहीं रखा है। कोई भी फिल्म निर्माता अपना पक्ष रखता है। फिल्म में विलेन कमजोर होगा तो फिल्म नहीं चलेगी।

कश्मीरी लोग फिल्म बनाएंगे तो वे अपना पक्ष दिखाएंगे। इसलिए इसमें ज्यादा खींचतान की जरूरत नहीं है। क्योंकि हर व्यक्ति का अपना नजरिया है। प्रधानमंत्री ने बोलने की आजादी दी है। यह सराहनीय है। इसे सेल्यूट करना चाहिए। अब लोग गुजरात दंगों पर फिल्म बना सकते हैं, किसानों पर गाड़ी चढ़ाई उस पर फिल्म बना सकते हैं। यह लोकतंत्र है। हरियाणावी फिल्मों से जुड़े जर्नादन शर्मा, रामपाल बल्हारा, सुशील सैनी, संगीता देवी, केलापति राहिवाल भी उनके साथ थी। 
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यशपाल शर्मा की आने वाली फिल्म दादा लख्मीचंद का पोस्टर। - फोटो : सोशल मीडिया
चालो उस देश मैं जहां संगीत हो.. 
मेरी फिल्म दादा लख्मी में गीत की पंक्ति, चालो उस देश मैं जहां संगीत हो, न हो द्वेष कलेश उडै भाई चारा हो.. से समाज को एक संदेश दिया है। इसमें कहा गया है कला के क्षेत्र में जीतना है तो उस दुनिया में जीते हैं, जहां न किसी की टांग खिंचाई है न किसी के पेट पर लात पड़े। एक ऐसी दुनिया बसाएं जो अब तक नहीं बसी है। यही फिल्म की टैग लाइन है। यह फिल्म अगस्त तक आ जाएगी। 

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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रंग मंच का नहीं है कोई विकल्प 
अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि रंग मंच प्रभावित हुआ है। ओटीटी, वेब सिरीज, सोशल मीडिया के रूप में अनेक माध्यम आ गए हैं। इस कारण थियेटर में जाकर नाटक देखने वाले लोग भी कम बचे हैं। लोग सिनेमा में भी नहीं जा रहे हैं। मोबाइल में ही लोगों को सब मिल रहा है। यह शॉर्ट कट है। रंग मंच या थियेटर का विकल्प नहीं है। रंग मंच की ताकत उसके गुण में है, दूसरे किसी संसाधन में नहीं। 
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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहली कक्षा से विषय के रूप में शुरू हो थियेटर शिक्षा 
अभिनेता ने कहा कि स्कूलों में रंग मंच की पढ़ाई में बच्चों को शुरू से ही जूझना सिखाएंगे। बच्चे आपस में मंच पर तर्क वितर्क के जरिये ज्यादा बेहतर ढंग से चीजों को सीख सकेंगे। टीम भावना से काम करेंगे। सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ सकेंगे। यह समाज व देश के लिए बेहतर कदम साबित होगा। बच्चों में सच कहने की क्षमता आएगी।

वे अपने अभिभावकों से सच या झूठ स्पष्ट शब्दों में कह सकेंगे। उनमें आत्मविश्वास आएगा। इसलिए स्कूलों में पहली कक्षा से ही एक विषय के रूप में थियेटर शिक्षा दी जानी चाहिए। इससे बच्चों में डर, शर्म व झिझक ही दूर नहीं होगी, उनकी सोचने समझने की शक्ति बढ़ेगी, प्रतिभा में निखार आएगा व नेतृत्व की भावना पैदा होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। 
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