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खौफ ऐसा...स्कूल जाने से डर रहे बच्चे: 'तुम्हारे पापा आए हैं, बुला रहे हैं', कहकर ले गया फिर सुनसान जगह पर हमला

Sun, 01 Nov 2026 02:29 PM IST
Sharukh Khan दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला

सार

पंचकूला शहर के एक सरकारी स्कूल में छह साल की बच्ची पर ईंट से हमले के मामले में शिक्षा विभाग ने शनिवार को दो कक्षा अध्यापकों को निलंबित कर दिया। घटना की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की गई हैं। आरोपी 8 साल के बच्चे ने बच्ची को लात-घूंसे और ईंट से प्रहार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बच्ची के सिर, नाक और चेहरे पर गंभीर चोटें आई थी। करीब 36 घंटे बाद उसे होश आया। 
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Panchkula School Attack - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
स्कूल, जहां बच्चे खुद को सबसे सुरक्षित समझते हैं, वहां हुई इस खौफनाक वारदात ने अभिभावकों का भरोसा हिला दिया है। छह साल की मासूम को पिता के बुलाने का झांसा देकर सुनसान हिस्से में ले जाया गया और फिर उस पर ईंटों से बेरहमी से वार किए गए। 

बच्ची को बचाने के लिए स्कूल परिसर में न कोई कर्मचारी मौजूद था और न ही खराब पड़े कैमरे उसकी सुरक्षा कर पाए। वारदात का खुलासा होने के बाद अब खौफ ऐसा है कि बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। जिस कक्षा में सामान्य दिनों में 70 से 80 विद्यार्थी आते थे, वहां शनिवार को महज 14 बच्चे पहुंचे। अभिभावकों का सवाल है कि जब स्कूल के भीतर ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो उन्हें वहां भेजने का भरोसा कैसे करें?
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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों को समझाती पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तुम्हारे पापा आए हैं, बुला रहे हैं...कहकर ले गया फिर सुनसान जगह पर हमला 
घटनाक्रम के अनुसार, तीसरी कक्षा का छात्र बच्ची के पास पहुंचा और कहा, ‘तुम्हारे पापा आए हैं, बुला रहे हैं।’ पिता का नाम सुनकर मासूम उसके साथ चल पड़ी। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार दोपहर करीब 3:15 बजे छात्र ने सीढ़ियों पर लगाया गया ब्लैकबोर्ड हटाया। यह ब्लैकबोर्ड छोटे बच्चों को सीनियर विंग की ओर जाने से रोकने के लिए लगाया जाता था। रास्ते की रुकावट हटाकर वह बच्ची को पहली मंजिल के सुनसान हिस्से में ले गया। करीब 3:45 बजे वहां बच्ची पर ईंटों से ताबड़तोड़ वार किए गए।
 
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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लौटने लगी तो बेंच पर पटका सिर, फिर ईंटों से वार
सीसीटीवी फुटेज में आरोपी छात्र बच्ची को लात मारते, ईंट से हमला करते और जमीन पर गिरने के बाद उसके सिर पर कई वार करते दिखाई दे रहा है। स्कूल प्रबंधन की पूछताछ में छात्र ने कथित तौर पर बताया कि बच्ची के चिल्लाने से वह डर गया था और उसे चुप कराने के लिए हमला किया। हालांकि, हमले के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस बच्चे के व्यवहार और घटना के कारणों की पड़ताल कर रही है। इस घटना ने स्कूल में बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लहूलुहान बच्ची कमरे में बंद, बाहर से लगा था ताला
परिजनों के मुताबिक काफी देर तक बच्ची नहीं मिली तो उसकी तलाश शुरू की गई। ऑटो चालक उसे लेने पहुंचा था, लेकिन बच्ची वहां मौजूद नहीं थी। तलाश करते हुए परिजन पहली मंजिल पर पहुंचे तो एक कमरे के बाहर ताला लगा मिला। कमरा खुलवाया गया तो बच्ची अंदर खून से लथपथ हालत में पड़ी थी। बच्ची के चाचा का आरोप है कि चौकीदार ने कमरे को बाहर से बंद करते समय अंदर झांककर भी नहीं देखा। यदि कमरा बंद करने से पहले जांच की जाती तो बच्ची को समय रहते मदद मिल सकती थी। इस आरोप ने घटना के बाद स्कूल में निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल और गहरे कर दिए हैं।
 
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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुरक्षा व्यवस्था पर पांच बड़े सवाल
  • जब रास्ता संवेदनशील था तो वहां कोई कर्मचारी तैनात क्यों नहीं था?
  • सीढ़ियों पर लगा ब्लैकबोर्ड हटाकर छात्र बच्ची को ऊपर ले गया, किसी को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
  • 28 अक्तूबर से दो सीसीटीवी कैमरे खराब थे तो उन्हें समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया?
  • पहली मंजिल और सुनसान हिस्से तक बच्चों की निगरानी की कोई व्यवस्था क्यों नहीं थी?
  • छुट्टी के समय बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और उसे निभाने में चूक क्यों हुई?


 
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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आठ वर्षीय छात्र की पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग में जांच कराई गई है। विशेषज्ञ उसकी मानसिक स्थिति, समझ और व्यवहार का आकलन कर रहे हैं। आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच रिपोर्ट और किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के अनुसार तय होगी। - विक्रम मेहरा, एसीपी
 
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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छोटी उम्र, बड़ा गुस्सा... बच्चों की हिंसक हरकतों को बचपना समझकर न टालें
बच्चा छोटी-छोटी बातों पर असामान्य गुस्सा करे, बार-बार दूसरे बच्चों को चोट पहुंचाए या किसी को नुकसान पहुंचाने के बाद भी उसे अपनी गलती का अहसास न हो तो इसे बचपना समझकर नजरअंदाज न करें। पंचकूला के स्कूल में छह साल की बच्ची पर हमले की घटना ने बच्चों के आक्रामक व्यवहार को समय रहते पहचानने की जरूरत फिर सामने रखी है।

 

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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों को समझाती पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इंडियन साइकेट्री सोसाइटी के सदस्य डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, आक्रामक व्यवहार के संकेत चार साल की उम्र से भी दिख सकते हैं। इनके पीछे मनोवैज्ञानिक, व्यवहार संबंधी या विकासात्मक कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर या अन्य मानसिक एवं व्यवहार संबंधी समस्याएं भी वजह हो सकती हैं। सही कारण विशेषज्ञ की जांच से ही पता चलता है।
 

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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
बार-बार मारपीट करना, दूसरे बच्चों को डराना या चोट पहुंचाना, जानबूझकर परेशान करना, दूसरों के दर्द के प्रति संवेदनहीन रहना और समझाने के बावजूद हिंसक व्यवहार दोहराना सतर्क होने के संकेत हैं।

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स्कूल में बच्ची पर हमले के बाद मौके पर परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डांट नहीं, समझ और समय पर इलाज जरूरी
डॉ. प्रमोद के मुताबिक बच्चे को शरारती या बिगड़ा बताकर छोड़ने के बजाय उसके व्यवहार का कारण समझना जरूरी है। लगातार बदलाव दिखें तो बाल मनोचिकित्सक से सलाह लें। बच्चे के साथ समय बिताएं, उसकी भावनाएं समझें और हिंसा पर स्पष्ट सीमाएं तय करें। मारपीट या अपमानजनक सजा से बचें। अभिभावक और शिक्षक नियमित संवाद रखें और ऐसी घटनाएं छिपाने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लें।
 

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Panchkula School Attack - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह था मामला
स्कूल में बच्ची पर हमला: सिर बेंच पर पटका, फिर लात-घूंसों और ईंट से वार, दो सस्पेंड; दिल दहलाने वाला सीसीटीवी
पंचकूला के सरकारी स्कूल में छह साल की स्पेशल बच्ची पर आठ वर्षीय छात्र के हमले के मामले में हरियाणा सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्ची के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शनिवार को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। स्कूल पर बच्चों की सुरक्षा व देखभाल में लापरवाही बरतने का आरोप है। वहीं, देर शाम बच्चे को जुवेनाइल जिस्टस बोर्ड के सामने पेश कर अंबाला के बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। वहीं, घटना के बाद परिजनों ने स्कूल के बाहर विरोध भी जताया। 

 

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Panchkula School Attack - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
शिक्षा विभाग ने बच्ची की कक्षा इंचार्ज सिमरनजीत और हमला करने वाले छात्र की कक्षा इंचार्ज पूजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रधानाचार्य पर कार्रवाई के लिए शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के निर्देश पर दो कमेटियां गठित की गई हैं। शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे के भीतर व जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिन में रिपोर्ट देगी। 

 

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पंचकूला स्कूल में बच्चे ने बच्ची पर किया हमला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जांच में स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की भी पड़ताल होगी। हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 28 अक्तूबर की घटना की परिस्थितियों, स्कूल में निगरानी व्यवस्था, तत्काल उठाए गए कदमों, सीसीटीवी और ड्यूटी रोस्टर का ब्योरा मांगा है।

आयोग की अध्यक्ष त्रिप्ति हरिपाल श्योराण ने शनिवार को पीजीआई पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। बच्ची के चेहरे और नाक में फ्रैक्चर सहित गंभीर चोटें आई हैं। उसकी हालत खतरे से बाहर है। सरकार पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। परिवार की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।

सवा तीन मिनट का सीसीटीवी फुटेज वायरल    
28 अक्तूबर को हुई इस घटना का सवा तीन मिनट का फुटेज वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि आठ वर्षीय छात्र पहले बच्ची का सिर बेंच पर पटकता है। इसके बाद लात-घूंसों से हमला करता है। इस बीच में कई बार बाल पकड़कर घसीटता भी है। फिर ईंट और डस्टबीन से कई बार प्रहार करता है। बच्ची अचेत हो जाती है, फिर भी आरोपी छात्र उस पर हमला करता रहता है। घटना का पता तब चला जब ऑटो चालक बच्ची को लेने स्कूल गया, लेकिन वो वहां नहीं मिली। बच्ची के पिता ने स्कूल पहुंचकर तलाश की तो वह कक्षा के अंदर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन बच्ची को करीब 36 घंटे बाद होश आया। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मासूम कमरे में खून से लथपथ पड़ी रही, बाहर से ताला लगाकर चला गया चौकीदार
स्कूल में आठ वर्षीय छात्र के हमले के बाद छह वर्षीय बच्ची पहली मंजिल के कमरे में खून से लथपथ पड़ी रही, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। परिजनों का आरोप है कि स्कूल बंद करते समय चौकीदार ने कमरे के अंदर बच्ची के होने की जांच तक नहीं की। दरवाजे की कुंडी लगी देखकर बाहर से ताला लगाया और चला गया। 

बच्ची के चाचा के अनुसार, आरोपी छात्र ने कमरे में ले जाकर उसके सिर और चेहरे पर ईंट से कई वार किए थे। काफी देर बाद ऑटो चालक बच्ची को लेने पहुंचा तो वह नहीं मिली। तलाश के दौरान पहली मंजिल के कमरे पर बाहर से ताला लगा मिला। कमरा खुलवाया तो बच्ची अंदर लहूलुहान हालत में पड़ी थी। इस खुलासे ने स्कूल में छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा और कमरों की जांच के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 
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