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एचएयू दीक्षांत समारोह: राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- गर्व की बात है कि डिग्री-मेडल लेने वालों में 70 फीसदी बेटियां

Mon, 24 Apr 2023 09:15 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

उन्होंने 865 विद्यार्थियों को डिग्री व 124 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए। समारोह में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कृषि मंत्री जेपी दलाल उपस्थित रहे।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बतौय मुख्य अतिथि पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बढ़ती जनसंख्या, कम होती कृषि भूमि, गिरते भूजल-स्तर, मिट्टी की घटती उर्वरता, जलवायु परिवर्तन की चिंताओं का समाधान खोजना होगा। पर्यावरण जैव-विविधता को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती है।

मैं भी एक किसान की बेटी हूं। गर्व का विषय है कि डिग्री और मेडल लेने वालों में 70 फीसदी बेटियां हैं, यह खुशी की बात है। यह कहना है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का। वे सोमवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के 25वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।

इस दौरान उन्होंने 865 विद्यार्थियों को डिग्री व 124 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए। समारोह में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कृषि मंत्री जेपी दलाल उपस्थित रहे।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बतौय मुख्य अतिथि पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राष्ट्रपति ने कहा कि गर्व का विषय है कि हमारी बेटियां कृषि एवं संबद्ध विज्ञान सहित अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री, पुरस्कार या पदक प्रदान करने का ही अवसर नहीं है, बल्कि अर्जित क्षमताओं के माध्यम से चुनौतियों को स्वीकार करना और अपने सपनों को साकार करने का संकल्प लेने का अवसर है।
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बच्चों को डिग्री प्रदान करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आज आपकी शिक्षा का एक हिस्सा पूरा हुआ है। विद्यार्थी के रूप में आप सभी ने जो भी सीखा है, उसका व्यावहारिक रूप से उपयोग करने का अवसर जीवन में आएगा। दुनिया भर के नवीनतम नवाचारों से अवगत रहना होगा। हरियाणा केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य है। एचएयू में प्रतिवर्ष लगभग 18000 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन होता है।

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खुशी जताते बच्चे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती
आज ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी चुनौतियां हैं। खेती की लागत को कम करने, उत्पादकता बढ़ाने, उसे पर्यावरण अनुकूल बनाने व उसको और अधिक लाभकारी बनाने में तकनीक पर काम करना होगा। पराली जलाने से प्रतिवर्ष पंजाब, हरियाणा और दिल्ली क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है।


हमें प्रदूषण की समस्या का समाधान न सिर्फ अपने स्वास्थ्य के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए भी ढूंढना है। सरसों की आरएच 725, मूंग की 421 तथा 1142 देश भर में लोकप्रिय हैं।
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एचएयू के 25वें दीक्षांत समारोह में मौजूद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्टार्ट अप में प्रचुर संभावनाएं
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक स्टार्ट-अप हब के रूप में उभरा है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको सिस्टम आज भारत में है। कृषि और इससे जुड़े कई क्षेत्रों में स्टार्ट-अप की प्रचुर संभावनाएं हैं। इसलिए युवाओं को नौकरी लेने वाले के बजाय नौकरी देने वाले बनें। कृषि विश्वविद्यालय ने एक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर विकसित करने में कामयाबी हासिल की है। प्रदेश में एचएयू के सहयोग से 90 से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं।
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खुशी जताते बच्चे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चावल की खेती में पानी बचाने का प्रयास : दत्तात्रेय
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय भारत के कृषि विश्वविद्यालयों में पांचवें रैंक पर आता है। एचएयू ने प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने दीन दयाल उपाध्याय उत्कृष्टता केंद्र के नाम से 123 एकड़ में जैविक कृषि फार्म की स्थापना की है। मोटे अनाजों के अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय द्वारा पोषक अनाज अनुसंधान केंद्र को भिवानी के गोकुलपुरा में स्थापित किया गया है। जल संरक्षण नीति के तहत विश्वविद्यालय ने चावल की खेती में पानी को बचाने के लिए प्रत्यक्ष प्रत्यारोपण तकनीक का विकास किया है।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बतौय मुख्य अतिथि पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
26 लाख टन से 183 लाख टन पहुंचा अन्न उत्पादन : मनोहरलाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के समय खाद्यान्न उत्पादन 26 लाख टन था, जो अनुसंधान पद्धतियों और कृषकों की जागरूकता और नए बीजों के उत्पादन से अब बढ़कर 183 लाख टन पर पहुंच गया है।


एचएयू की ओर से विकसित किये गये बीजों, खेती की आधुनिक तकनीकों आदि को अपनाकर हरियाणा के किसान ने देश के अन्न भण्डार को भरा है। अनाज भंडारण में आत्मनिर्भर होने के साथ दूसरे देशों में भी निर्यात कर रहे हैं।
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विद्यार्थियों ने प्राप्त की डिग्रीयां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि हमें कम पानी से उगने वाली फसलों के अधिक पैदावार वाले बीज विकसित करनी होंगी। कृषि उत्पादन बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने व किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध करवाने के लिए एकीकृत कृषि मॉडल पर काम करना होगा।

कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने एचएयू की उपलब्धियां गिनाईं।इस मौके पर प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल, शहरी निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता,बिजली मंत्री रणजीत सिंह, राज्यमंत्री अनूप धानक, डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा आदि मौजूद रहे।
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