हरियाणा के अंबाला में दो एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद में सेना से सेवानिवृत्त नायक ने पत्नी और रिश्तेदारों संग मिलकर छोटे भाई और उसकी पत्नी समेत तीन बच्चों की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। इस दौरान बीच बचाव करने आई मां को भी मौत के घाट उतार दिया। परिजनों की हत्या के बाद आरोपियों ने उनके शवों को जलाने का भी प्रयास किया। हमले में पिता भी घायल हो गया, पिता ने मौके से भागकर जान बचाई। साथ ही पुलिस को सूचना दी। घायल को चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ से पिता ओम प्रकाश को मंगलवार छुट्टी मिल गई। सुबह 11 बजे छुट्टी मिलने के बाद ओम प्रकाश अपनी बेटी के घर बराड़ा के थम्बड़ गांव स्थित आवास पर गए। उनके साथ अन्य रिश्तेदारों ने बताया कि बड़े बेटे की बर्बरता के बाद ओम प्रकाश की हिम्मत ही नहीं पड़ी कि वो घर जाएं।
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- फोटो : अमर उजाला
संस्कार के दौरान अंतिम समय भी उन्हें अपने छोटे बेटे व उसके परिवार, पत्नी का चेहरा देना भी नसीब नहीं हुआ। बेटे भूषण द्वारा किए गए हमले में ओम प्रकाश की जहां दो उंगलियों में फ्रैक्चर आ गया था, वहीं कान पर चोट आई तो वहीं सिर में भी टांके लगे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
अंबाला के नारायणगढ़ थाने में दोपहर के समय गांव थंबड़ से ओमप्रकाश के दामाद विनोद व अन्य लोग गए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने पुलिस को कहा कि ओमप्रकाश की अस्पताल से छुट्टी हो गई थी। कोई बयान दर्ज करने हों तो जरूर आएं।
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इसके बाद वह अपने गांव लौट गए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस सख्त से सख्त कार्रवाई करे। हर बार दोनों भाइयों में झगड़ा होता था तो बहनें बीच-बचाव के लिए जाती थीं। मगर इस बार तो किसी ने सुना भी नहीं।
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यह है पूरा मामला
दरअसल, दो एकड़ जमीन के लिए सोमवार की रात मुख्य आरोपी भूषण ने अन्य के साथ मिलकर अपने छोटे भाई हरीश सहित उसकी पत्नी सोनिया, दो भतीजी पांच वर्षीय यशिका, आठ वर्षीय परी और एक छह माह के भतीजे मयंक सहित मां सुरोपी की गला रेतकर हत्या कर दी थी।
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- फोटो : अमर उजाला
बाप ओमप्रकाश भी जानलेवा हमला किया था लेकिन वह जान बचाकर भाग गया था। सुराग मिटाने के लिए शव की घर में ही शटरिंग की बल्लियों पर चिता बनाकर डीजल से आग लगा दी थी। समय रहते पिता ओमप्रकाश मदद लेकर आया तो अधजले शवों को बाहर निकाला।
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भूषण के सेवानिवृत्ति के बाद शुरू हुए विवाद
असल विवाद तो आरोपी भूषण के सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद शुरू हुआ। करीब सात साल पहले जब वह घर आया तो कुछ दिन तक तो सब ठीक रहा। फिर दोनों भाइयों में छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगा। घर की महिलाएं भी कई बार इस विवाद में आमने-सामने होतीं। बस यहीं से दोनों में नफरत का बीज पनपता चला गया।
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- फोटो : अमर उजाला
छोटे-छोटे विवाद कब दो एकड़ खेत तक आ गए किसी को पता भी नहीं चला। जब विवाद बढ़ने लगे तो पिता ओम प्रकाश ने सोचा कि जमीन बांट देते हैं तो दोनों शांत हो जाएंगे। जमीन भी मौखिक तौर पर बांट दी गई।
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मगर विवाद फिर भी न थमा। तब दोनों भाई और माता पिता एक ही घर में रहते थे। कुछ समय पहले ही बढ़ती कलह को देखते हुए मृतक हरीश ने अपना घर भाई के घर के पीछे बना लिया। तीन कमरों का यह घर भले ही कच्चा था मगर हरीश का परिवार खुश था।
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मृतक हरीश के सुनसान पड़े घर पर रिश्तेदार हालात देखते हुए।
- फोटो : संवाद
पहले शुरू हुआ था रास्ते का विवाद
ग्रामीण बताते हैं कि दोनों भाइयों में विवाद होता तो तत्काल डायल 112 पर कॉल करके बुला लेते थे फिर शांत भी हो जाते थे। खुद गांव के सरपंच नरेंद्र भी दोनों भाइयों के झगड़े में पंचायत में गए। उन्होंने दोनों को समझाया और वह अपनी अपनी गलती मानकर शांत हो जाते। इसके बाद भूषण और हरीश में डेरे के रास्ते के लिए विवाद हो गया। यहां से नफरत और बढ़ गई।
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घटना के बाद पहुंची पुलिस।
- फोटो : संवाद
पंचायत ने फिर बीच में आकर रास्ते की समस्या का निराकरण कराया। मगर विवाद फिर भी न थमे। एक बार तो सरपंच ने नारायणगढ़ थाने में जाकर दोनों भाइयों को छुड़ाया था। यहां तक नफरत इतनी बढ़ गई कि बार-बार झगड़े होने लगे। ऐसे में गांव के लोगों ने भी दूरी बना ली। बताते हैं कि गांव से अलग डेरे में घर होने के कारण भी अब लोगों का आना-जान परिवार के साथ कम हो गया था।
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मृतकों के फाइल फोटो।
- फोटो : संवाद
तीन आरोपी एक दिन के रिमांड पर, वकीलों ने नहीं लिया केस
नारायणगढ़-रायपुरानी सीमा स्थित रतौर गांव में अपने ही परिवार की बर्बरता से छह हत्याओं के मामले में पकड़े गए चारों आरोपियों को पुलिस ने मंगलवार कोर्ट में पेश किया। सीनियर डिविजन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल की कोर्ट में इस मामले में करीब 15 मिनट तक सुनवाई हुई।
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मृतकों के फाइल फोटो।
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आरोपियों की तरफ से किसी भी वकील ने वकालतनामा पेश नहीं किया। पुलिस की ओर से सरकारी वकील ने हत्या में शामिल गंड़ासी और कुल्हाड़ी आदि हथियार की बरामदगी और अन्य की संलिप्तता पर पूछताछ करने के लिए दो दिन का रिमांड मांगा था।
इस पर कोर्ट ने एक दिन का रिमांड मंजूर किया। कोर्ट ने आरोपी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जबकि तीनों आरोपी भूषण, साला मनीष उर्फ जॉनी, अमल उर्फ टोनी का एक दिन की रिमांड मंजूर की। अब पुलिस आरोपियों को हत्या के बाद छिपाए हथियारों की बरामदगी के लिए लेकर जाएगी। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि यह हथियार रतौर और पास के किसी गांव में छिपाए हैं।