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यूपी सरकार-2: विकास-गरीब कल्याण की योजनाओं को और गति देंगे योगी, लिखेंगे नया इतिहास

Sat, 26 Mar 2022 02:11 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

योगी मॉडल पर जनता का यह विश्वास ही है कि उसने लगातार दो बार 2019 एवं 2022 में पूरे दिल और दिमाग से अपनी मुहर लगाई। गोरक्षपीठ के महंत आदित्यनाथ से जो परिचित हैं, वे जानते हैं कि वह लोककल्याण के कार्य को अपनी पूरी क्षमता से करते हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
योगी आदित्यनाथ ने आज इतिहास रचा है। योगी के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार बना रही है। राशन और सुशासन के ‘गंठबंधन’ ने जनता को ‘सरकार’ होने का अहसास कराया है।

बीते पांच सालों में योगी आदित्यनाथ जनता का विश्वास जीतने में सफल हुए हैं तो अब ‘योगी 2.0’ में उनके सामने उस विश्वास को और मजबूत बनाने की चुनौती होगी। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए विकास और गरीब कल्याण की रफ्तार को और तेज करना होगा। इसके लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता है, जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज हो सके। योगी को अपनी छवि के अनुरूप कठोर कदम उठाने पड़ेंगे।

 
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मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
विकास के योगी मॉडल को समझने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर और नाथपंथ के बारे में जनना आवश्यक है। जाति, पंथ का भेदभाव मिटाकर सामाजिक समरसता की स्थापना और लोक कल्याण ही नाथपंथ है। नाथपंथ के महंत के लिए राजनीति लोककल्याण का माध्यम है। बस इसी मंत्र में निहित है, राजनीतिक इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और दृढ़ प्रशासक। नाथपंथ के इसी तत्व में रचा-बसा है।

योगी मॉडल, जिसने लोगों को विकास और लोक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ का स्वाद चखाया। एक नए लाभार्थी वर्ग ने जन्म लिया है, जिसने बीजेपी को उत्तर प्रदेश की सत्ता में आसीन करा दिया। लेकिन, यह बिना सुदृढ़ शासन व्यवस्था के संभव नहीं था। इसी काननू के राज की स्थापना योगी मॉडल की रीढ़ है। यहीं से जन्मा है निडर, निर्भीक प्रशासक, जिसे आम लोगों ने अपनी भाषा में बुलडोजर बाबा का नाम दे दिया।

 
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योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में योगी मॉडल उत्तर प्रदेश के चहुंमुखी विकास को गति दे रहा है। एक नए उत्तर प्रदेश का सृजन हो रहा है। योगी मॉडल में आधुनिकता एवं परंपरा का सम्मिश्रण है। नए उत्तर प्रदेश को अपनी अस्मिता पर गर्व है। एक तरफ सांस्कतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुनर्जागरण हो रहा है। अयोध्या, काशी, मथुरा तथा प्रयागराज सज रहे हैं और इन स्थलों को पर्यटन एवं व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है।

 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, दूसरी तरफ एक्सप्रेस-वे का जाल बिछ रहा है।  औद्योगिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। योगी ने उत्तर प्रदेश की अक्षम एवं राजनीतिकरण से ग्रसित नौकरशाही पर नकेल कसकर, ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री पर रोक लगा दी। बिना हस्तक्षेप के कार्य करने की स्वतंत्रता देकर योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य किया। जिसे लोगों ने महसूस भी किया। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के मतदाताओं जाति, पंथ एवं मजहब की बेड़ियों को तोड़ कर योगी मॉडल पर अपनी मुहर लगाई है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
इसी मॉडल की सफलता थी कि वैश्विक महामारी कोविड के कुशल प्रबंधन में योगी एक ‘दार्शनिक राजा’ बन कर उभरे और आबादी की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य में जीवन और जीविका दोनों बचाने में सफल रहे। उनके कार्यकाल के दो साल कोविड महामारी से जूझते हुए बीते, लेकिन विकास की रफ्तार भी धीमी नहीं हुई। जब दिल्ली एवं मुंबई जैसे महानगरों ने कामगारों, मजदूरों को भगा दिया, तब योगी उनके मसीहा बन कर निकले। इस मुश्किल घड़ी में इन गरीबों के बीच मुफ्त राशन एवं खाते में सीधे कैश ट्रांसफर सुनिश्चित कर इनका दिल जीत लिया। योगी मॉडल का प्रमुख मन्त्र है जनकल्याण की प्रतिज्ञा एवं ईमानदारी और विश्वसनीयता। यही वजह है कि डबल इंजन की मोदी-योगी सरकार भ्रष्टाचार एवं परिवारवाद का तिरस्कार कर जनकल्याण में निरंतर क्रियाशील रही।

 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
योगी मॉडल पर जनता का यह विश्वास ही है कि उसने लगातार दो बार 2019 एवं 2022 में पूरे दिल और दिमाग से अपनी मुहर लगाई। गोरक्षपीठ के महंत आदित्यनाथ से जो परिचित हैं, वे जानते हैं कि वह लोककल्याण के कार्य को अपनी पूरी क्षमता से करते हैं। परिणाम की चिंता हरगिज नहीं करते। शायद अपने कार्य पर ही पूरा विश्वास था कि योगी तमाम आशंकाओं एवं विरोधों के बावजूद अपने कार्यकाल के पांच साल में कभी विचलित प्रतीत नहीं हुए।
(डॉ. महेंद्र कुमार सिंह, गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीति विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर)
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