फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व टीबी दिवस: शुगर के मरीजों को टीबी का खतरा चार गुना ज्यादा, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे हैं सलाह

Wed, 24 Mar 2021 12:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

  • ब्रेन और हिलरी की टीबी सबसे ज्यादा खतरनाक
  • बच्चों में ब्रेन और मिल्यरी की टीबी सबसे ज्यादा
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यदि आप शुगर (मधुमेह) के मरीज हैं तो सावधान रहें, क्योंकि ऐसे लोगों को टीबी का खतरा चार गुना ज्यादा होता है। 30 की उम्र से अधिक लोगों को अगर शुगर है और लगातार खांसी आ रही है तो टीबी की जांच अवश्य करा लें। टीबी का वायरस बेहद खतरनाक होता है। इसका संक्रमण करीब छह से आठ घंटे के अंदर फैलता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि शुगर के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से शुगर के रोगी में संक्रमण की आशंका अधिक रहती है। ब्रेन और मिल्यरी (ब्लड में) की टीबी ज्यादा खतरनाक होती है। यह टीबी अक्सर बच्चों में पाई जाती है। शुगर और टीबी से ग्रसित मरीजों पर दवाओं का असर भी कम होता है।


 
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऐसे लोगों को मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी का खतरा ज्यादा रहता है। बताया कि दुनियाभर में 10 प्रतिशत टीबी के मामले शुगर से जुड़े हैं। दोनों ही रोगों की पहचान देर से होने के कारण स्थिति गंभीर हो जाती है। शुगर के मरीजों को दो से अधिक दिनों तक लगातार खांसी आती है तो टीबी की जांच जरूर करा लें।

ब्रेन और मिल्यरी टीबी ज्यादा खतरनाक
आईएमए सचिव व चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि ब्रेन और मिल्यरी टीबी का खतरा बच्चों में ज्यादा होता है। ब्लड की टीबी खतरनाक होती है। अगर एक बार टीबी का वायरस खून में चला गया तो वह शरीर के कई हिस्सों में पहुंच जाता है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की अपेक्षा कम होती है, ऐसे में यह ज्यादा नुकसान बच्चों को पहुंचाता है। ऐसे केस पूर्वांचल में मिल भी रहे हैं।


 
विज्ञापन

3 of 5
BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
निशुल्क है इलाज 
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एमडीआर एवं एक्सडीआर टीबी के मरीजों के इलाज में खर्च होने वाली तीन से चार लाख की दवाएं निशुल्क दी जा रही हैं। टीबी की कल्चर की जांच भी शुरू की गई है।

2367 बच्चों को गोद लेने वाले नहीं मिल रहे
बच्चों में टीबी ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। यही वजह है कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रदेश वासियों से अपील की थी कि सक्षम हर व्यक्ति टीबी ग्रसित एक बच्चे को गोद जरूर ले, जिससे की उसके खानपान की व्यवस्था बेहतर हो सके और वह जल्द ठीक हो सके। राज्यपाल की अपील केवल 99 लोगों ने ही सुनी। इन 99 में से 42 बच्चे टीबी से मुक्त हो चुके हैं। जबकि 52 का इलाज चल रहा है। दूसरी ओर जिले के 2367 बच्चों को गोद लेने वालों का इंतजार है। इनमें 90 प्रतिशत बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

 

4 of 5
टीबी मरीज। - फोटो : Social Media
टीबी अस्पताल में शुरू होगा आरडीपीएमयू
पूर्वी यूपी के 10 जिलों के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ को अब क्षयरोग नियंत्रण की ट्रेनिंग गोरखपुर में मिलेगी। इसके लिए एयरपोर्ट के पास स्थित 100 बेड टीबी अस्पताल में रीजनल टीबी प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (आरडीपीएमयू) संचालित होगा। यह सूबे का पांचवां आरडीपीएमयू होगा। इसमें गोरखपुर व बस्ती मंडल के अलावा मऊ, आजमगढ़ और बलिया भी जोड़े गए हैं। बुधवार से सेंटर संचालित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका लखनऊ से ऑनलाइन शुभारंभ करेंगे। इससे पहले प्रदेश में लखनऊ, आगरा, बरेली और वाराणसी में आरडीपीएमयू संचालित है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डॉट्स सेंटर पर इलाज करवाता टीबी का मरीज। - फोटो : amar ujala
क्या है टीबी
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी बाल और नाखून को छोड़कर किसी भी अंग में हो सकती है। टीबी ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होता है जो हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर देता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें