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Vinayaka Chaturthi 2021: विनायक चतुर्थी आज, जानिए कैसे होती है भगवान गणेश की पूजा

Mon, 14 Jun 2021 09:53 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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Ganesh Chaturthi 2021 - फोटो : अमर उजाला।
देश में विनायक चतुर्थी का पर्व 14 जून सोमवार यानी आज मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने में दो चतुर्थी पड़ती है। इस दिन को प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा होती है।

गणेश चतुर्थी का महत्व
पंडित अरविंद गिरि के अनुसार, हिंदू संस्कृति में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश के पूजन से भक्तों को सुख, समृद्धि और यश प्राप्ति होती है। वह सभी संकट से दूर करते हैं। मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी का व्रत करने से या फिर इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना करने से सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं।

विनायक चतुर्थी पूजा विधि
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, इस दिन पूजन से पूर्व नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर पवित्र आसन पर बैठें। फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजन सामग्री पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें दूर्वा (एक तरह की घास) जरूर अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के उपरांत सभी देवी-देवताओं का स्मरण करें। पूजा के अंत में गणेश जी की आरती करें। फिर प्रसाद का वितरण करें। अगले दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण करें। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें विनायक चतुर्थी की कथा...
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Ganesh chaturthi 2021 - फोटो : अमर उजाला
ये है विनायक चतुर्थी की कथा
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, एक बार माता पार्वती के मन में एक ख्याल आता है कि उनका कोई पुत्र नहीं है। ऐसे ही वो अपने मन से एक बालक की मूर्ति बनाकर उसमें जीवन भरती हैं। इसके बाद वे कंदरा में स्थित कुंड में स्नान करने के लिए चली जाती हैं। लेकिन जाने से पहले माता अपने पुत्र को आदेश देती हैं कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति को कंदरा में प्रवेश नहीं करने देना।
 
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गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
बालक अपनी माता के आदेश का पालन करने के लिए कंदरा के द्वार पर पहरा देने लगता है और कुछ समय बीत जाने के पश्चात भगवान शिव वहां पहुंचते हैं। भगवान शिव जैसे ही कंदरा के अंदर जाने लगते हैं तो वह बालक उन्हें रोक देता है। महादेव बालक को समझाने का प्रयास करते हैं। लेकिन वह उनकी कोई बात नहीं सुनता है। जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव त्रिशूल से बालक का शीश धड़ से अलग कर देते हैं।

 

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गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
इस घटना का आभास जब माता पार्वती को हुआ तो वह स्नान करके कंदरा से बाहर आती हैं और देखती हैं कि उनका पुत्र धरती पर प्राण विहीन पड़ा है। यह दृष्य देखकर माता क्रोधित होती हैं। जिसे देखकर सभी देवी-देवता भयभीत हो जाते हैं। तब भगवान शिव अपने गणों को आदेश देते हैं कि ऐसे बालक का सिर ले आओं जिसकी माता की पीठ उसके बालक की ओर हो। शिवगण एक हाथी का शीश लेकर आते हैं।

 
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गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : Amar Ujala
भगवान शिव गज के शीश को बालक के धड़ से जोड़कर उसे जीवित कर देते हैं। इसके बाद माता पार्वती शिवजी से कहती हैं कि यह शीश गज का है जिसके कारण सब मेरे पुत्र का उपहास करेंगे। तब भगवान शिव बालक को वरदान देते हैं कि आज से संसार में इन्हें गणपति के नाम से जानेगा। इसके साथ ही उन्हें प्रथम पूज्य भी बनाया गया।
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