फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां वैष्णो देवी हादसा: एकलौते बेटे की मौत की खबर मिलते ही फफक कर रो पड़े पिता, बोले- अब कौन देगा सहारा?

Sun, 02 Jan 2022 12:59 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
मृतक डॉक्टर अरुण सिंह के रोते-बिलखते परिजन।(इनसेट में मृतक की फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
वैष्णो देवी मंदिर में हुए हादसे में चौरीचौरा इलाके के रामपुर बुजुर्ग गांव के पूर्व प्रधान सत्यप्रकाश सिंह के एकलौते बेटे डॉ. अरुण प्रताप सिंह (31) की भी मौत हो गई। जेल बाईपास रोड स्थित हिंद हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अरुण अपनी पत्नी डॉ. अर्चना और दोस्तों के परिवार के साथ, देवी दर्शन करने गए थे। एक महीने पहले ही एक दिसंबर को उनकी शादी हुई थी।

जिस घर में बीते एक दिसंबर को शादी की खुशियां मनाई गईं थीं, वहीं एक जनवरी को मातम पसरा रहा। डॉक्टर की मौत की खबर आते ही घर ही नहीं, पूरे गांव के लोग गमगीन हो गए। परिजनों का रो-रोकर हाल खराब है। डॉक्टर का शव एयर एंबुलेंस से गोरखपुर लाया जा रहा है। इस घटना में डॉ. अरुण की पत्नी डॉ. अर्चना भी घायल हुईं हैं। 
विज्ञापन

2 of 5
रोते-बिलखते डॉक्टर अरुण सिंह के परिजन। - फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के मुताबिक, रामपुर बुजुर्ग गांव के डॉक्टर अरुण प्रताप सिंह बीएएमएस करने के बाद शहर के जेल बाईपास रोड पर निजी हॉस्पिटल चला रहे थे। कुशीनगर के पड़रौना की रहने वाली डॉ. अर्चना से उनकी शादी गत एक दिसंबर को हुई थी। इसमें शहर के तमाम डॉक्टरों ने शिरकत की थी। हादसे के शिकार अरुण के परिजनों के मुताबिक, शादी के एक माह पूरे होने के उपलक्ष्य में ही डॉक्टर दंपती वैष्णो देवी के दर्शन के लिए 29 दिसंबर को कार से जम्मू के लिए निकले थे। उनके साथ शहर के अजय, मुन्ना भी परिवार के सदस्यों के साथ गए हैं। 31 दिसंबर की शाम को डॉक्टर अरुण ने अपने पिता और माता से बात की थी। कहा था कि माता रानी के दर्शन करके जल्द ही घर आएंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वो नहीं, अब उनकी लाश आएगी। यही कहकर, डॉक्टर के पिता सुरेंद्र सिंह फफककर रो पड़े और कहा कि अब कौन सहारा देगा? अरुण की मां भी बिलखकर रोने लगीं। आसपास के लोगों ने ढांढस बंधाया। परिजन कई बार गश खाकर गिर पड़े।  
विज्ञापन

3 of 5
रोते-बिलखते डॉक्टर अरुण सिंह के परिजन। - फोटो : अमर उजाला।

भगदड़ की खबर पाते ही बेचैन हो गए थे घरवाले, सुरक्षित हैं पत्नी

शनिवार सुबह करीब नौ बजे सत्यप्रकाश सिंह को कुछ परिचितों से कटरा में भगदड़ की सूचना मिली तो वह बेचैन हो गए। बेटे और बहू के मोबाइल फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था। करीब 11 बजे उन्हें भगदड़ की चपेट में आए, उनके इकलौते बेटे की मौत की सूचना मिल गई। इस खबर से वे और गांव के लोग अवाक रह गए। दोपहर तक सत्यप्रकाश सिंह के घर ढांढस बंधाने वालों की भीड़ जुट गई। करीब एक बजे पता चला कि डॉक्टर अरुण प्रताप के साथ गईं, उनकी पत्नी व अन्य लोग सुरक्षित हैं।

4 of 5
डॉ. अरुण प्रताप सिंह की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

एयर एंबुलेंस से आएगा शव

पिता को तहसील प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि शव को एयर एंबुलेंस से लाया जाएगा। पहले शव को लखनऊ लाया जाना था, लेकिन फैसला बदल गया है। अब जम्मू एयरपोर्ट से डॉक्टर का शव गोरखपुर तक लाने का इंतजाम किया गया है।

हर किसी को खल गया मददगार का चला जाना

डॉक्टर अरुण प्रताप सरल स्वभाव के थे। उनका मृदुभाषी और व्यवहार कुशल होना, उनकी खास पहचान थी। उनके बचपन के मित्र दीपक प्रजापति, आनंद गुप्ता, धर्मवीर तथा पूर्व प्रधान जैनेंद्र मल्ल, प्रधान वेदप्रकाश पासवान ने बताया कि अरुण प्रताप ने डॉक्टर बनकर जितनी शोहरत हासिल की, उससे ज्यादा वह अपने अच्छे बर्ताव के चलते मशहूर थे। लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। गरीब मरीजों के इलाज पर होने वाले खर्च का भुगतान खुद कर देते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डॉक्टर अरुण सिंह की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

कोरोना काल में गांव वालों की मदद को रहते थे खड़े

कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में डॉ. अरुण लोगों की जिंदगी बचाने में जी-जान से जुटे थे। लॉकडाउन के समय महानगरों से घरों को लौट रहे लोगों के लिए लंगर लगवाया। हाइवे पर कैंप लगाकर लोगों की मदद भी की।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें