गोरखपुर चिड़ियाघर में तितलियों के रहने और सुरक्षित प्रजनन के लिए उनका घर बनकर तैयार हो गया है। प्रवेश द्वार के चारों तरफ और अंदर अलग-अलग प्रजाति के पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके बाद फूलों वाले पौधे लगाए जाएंगे। जिससे पार्क के अंदर तितलियों को अंडे देने और फूलों की सुगंध के बीच जीने के लिए मुफीद माहौल मिल सके। एक हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बने तितली पार्क में 70 से ज्यादा प्रजाति की तितलियां रखी जाएंगी।
चिड़ियाघर में प्रवेश करते दाएं तरफ तितली घर बनाया गया है। इसके बाहरी हिस्से में हेज (बायोलॉजिकल करियर) लगाया गया है, ताकि इस तरफ आने वाले पर्यटक सीमित दायरे में रहें। पार्क के आसपास खास तरह के फूलों के पौधे लगाए जाएंगे। इसमें वही पौधे होंगे जिनमें मकरंद (नेक्टर) पाया जाता है, क्योंकि तितलियों को भोजन के रूप में मकरंद बहुत पसंद है।
प्राणि उद्यान के उप प्रभागीय वन अधिकारी संजय कुमार मल्ल ने बताया कि तितलियों के आने जाने पर किसी प्रकार की पाबंदी नहीं रहेगी। वह चिड़ियाघर के अंदर बेरोक टोक घूम सकती हैं। उनके रुकने और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। संजय ने बताया कि तितलियों का जीवन अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क के चक्र से गुजरता है। वयस्क तितली 10 से 12 दिन तक ही जीवित रहती है। इसी सब को ध्यान में रखते हुए पार्क के अंदर का काम तेजी से किया जा रहा है।
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गोरखपुर चिड़ियाघर।
- फोटो : अमर उजाला।
इन प्रजातियों को रखा जाएगा
लाइन ब्लू, डिंगी स्विफ्ट, बलका पैरट, स्पॉटेड पैरट, प्लेन टाइगर, कॉमन कैस्टर, कॉमन ग्लास यलो, कॉमन जे, डेनेड एगफ्लाई, लैमन मिगरेंट, इंडियन रेड फ्लैश, बुश ब्राउन, क्रिमसन टिप, रेड आई, अफ्रीकन बाबुल ब्लू और कॉमन शॉट सिल्वर लाइन
तितलियों के जीवन चक्र को समझाएंगे
पार्क में एक ऐसा सेंटर बनाया गया है जिसमें तितलियों के जीवनचक्र से संबंधित जानकारी फोटो के माध्यम से दिखाई जाएगी। इसके पीछे मंशा यही है कि तितलियों के जीवन चक्र को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए। दीवारों पर संरक्षित की गई मृत तितलियां (हरबेरियम एनिमल) भी लगाई जाएंगी। इससे जीव विज्ञान के छात्रों को चिड़ियाघर आने पर काम की जानकारी मिल सकेगी।
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गोरखपुर चिड़ियाघर।
- फोटो : अमर उजाला।
प्रजनन केंद्र में लग रहे होस्ट प्लांट
वन अधिकारी ने बताया कि तितलियों का जीवन फूल और मकरंद पर आश्रित होता है। तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के अपने होस्ट प्लांट होते हैं। तितलियां उन्हीं पर अंडे देती हैं। तितली घर के प्रवेश द्वार के बाद प्रजनन केंद्र बनाया गया है। यहां नीबू, कढ़ी पत्ता, हरशृंगार, पाम, मालती, गेंदा, अमलताश, जामुन, लौकी, बेल, नीम और तोरी के पौधे लगाए गए हैं। इनके पत्तों पर तितलियां अंडे देंगी।
अंदर लगेगा फाउंटेन
तितली घर में दो जगह फाउंटेन लगाए जाएंगे। अंदर की तरफ ओवर हेड स्प्रिंकलर (फव्वारा की पाइप) लगाया जाएगा। गर्मियों में इन्हीं के माध्यम से तितली घर को ठंडा रखा जाएगा। संजय ने बताया कि तितलियों को सामान्य तापमान की जरूरत होती है। इसलिए नमी के लिए अंदर की तरफ पानी के बौछारों की जरूरत पडे़गी।
तितलियों को भाता है लैंटाना का पौधा
संजय ने बताया कि तितली घर के अंदर लैंटाना का पौधा लगाया जाएगा। तितलियों को इसके पौधे पसंद आते हैं। वैसे तो लैंटाना की 11 प्रजातियां होती हैं, लेकिन इसकी कुछ प्रजातियों के पौधों को ही लगाए जाएंगे। इसके ऊपरी सिरे पर मकरंद होता है। इसके फूल लाल और सफेद समेत कई तरह के होते हैं, जिन्हें तितलियां बहुत पसंद करती हैं।