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यूपी का अनोखा गांव: यहां 74 साल पहले लगा था खून का दाग, अब इस खास वजह से है अलग पहचान

Wed, 26 May 2021 05:49 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरनगर।
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एकला शुक्ल गांव। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले का एकला शुक्ल एक ऐसा गांव है जहां लगभग हर घर से एक व्यक्ति सरकारी विभाग में सेवा दे रहा है। गांव का लगभग 60 फीसदी युवा सरकारी सेवाओं में विभिन्न पदों पर तैनात है। क्षेत्र में इस गांव की अपनी अलग पहचान है।

मेंहदावल विकास खंड मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बनकटा का राजस्व गांव एकला शुक्ल है। यहां की आबादी लगभग 200 है। कुल 70 घर हैं। गांव के राकेश शुक्ल पीसीएस जे में चयनित हुए थे। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव न्याय के पद पर आसीन हैं।
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एकला शुक्ल गांव के पीसीएस नीरज शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला।
वहीं यूपी पीसीएस में चयनित होकर नीरज शुक्ला असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर के पद पर सीतापुर में तैनात हैं। जबकि आईईएस में चयनित उत्कर्ष शुक्ला की तैनाती टेक्निकल मैनेजर एनएचएआई के पद पर लखनऊ में है।
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एकला शुक्ल गांव के पीसीएस उत्कर्ष शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला।
वहीं गांव के शक्ति कुमार शुक्ला, सुनील शुक्ला, चंद्र प्रकाश शुक्ला, वैभव शुक्ला, निशांत, सुधाकर शुक्ला, पीयूष, बृजेश, अभिलाष, सर्वेश त्रिपाठी, कृष्णा शुक्ला, रेनू शुक्ला, बबिता त्रिपाठी व जिज्ञाषा शुक्ला समेत 13 युवा और छह महिलाएं परिषदीय विद्यालय में बतौर शिक्षक तैनात हैं।

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एकला शुक्ल गांव। - फोटो : अमर उजाला।
गांव के मनोज त्रिपाठी मध्य प्रदेश में एपीओ के पद पर तैनात हैं। वहीं चंद्रकांत त्रिपाठी बिहार में एपीओ पद पर सेवा दे रहे हैं। 12 से अधिक बुजुर्ग शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
धनिया की खेती बर्बाद होने पर गांव में हुई थी हत्या
गांव के बुजुर्ग तेज प्रताप शुक्ल, पंडित राघव शुक्ल, शारदा शुक्ल ने बताया कि सन 1947 के आसपास गांव में धनिया की खेती को लेकर विवाद हुआ था। इसमें एक व्यक्ति की हत्या हो गई थी। करीब 12 लोग जेल गए थे। इस घटना के बाद से समाज में गांव की छवि खराब हुई थी लेकिन युवा वर्ग ने पढ़ाई के बूते गांव का नाम रोशन किया। अब इस गांव की अपनी अलग पहचान है।
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