‘वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे, इंसान वहीं है जो अपनी तकदीर बदल दे’, ये पंक्तियां भदोही के लाल और युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल पर बिलकुल सटीक बैठती हैं। उनके जीवन में जहां संघर्षों की दास्तान है, तो वहीं इसकी बदौलत हासिल की गईं उपलब्धियां आसमान की बुलंदियों को छूने की प्रेरणा भी देती हैं। यशस्वी जायसवाल, कोच ज्वाला सिंह की तीन वर्षीय बेटी कायरा सिंह के मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए शुक्रवार को गगहा विकास खंड स्थित करवल देवी मंदिर में सपरिवार पहुंचे थे।