कोविड के बाद ही मरीज सेप्टिसीमिया के शिकार नहीं हो रहे हैं, कुछ मामले ऐसे भी सामने आ रहे हैं, जिनमें गर्भस्थ शिशु भी सेप्टिसीमिया के शिकार मिले हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के मुताबिक गर्भस्थ शिशुओं में सेप्टिसीमिया के केस अचानक बढ़ गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह गर्भावस्था के दौरान साफ-सफाई की कमी है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार ने बताया कि सेप्टिसीमिया के केस बढ़ते जा रहे हैं। यह ज्यादा जानलेवा है। यह बीमारी गर्भस्थ शिशु के ब्लड सिस्टम को प्रभावित करती है। इससे जच्चा-बच्चा दोनों संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। बीआरडी में इस तरह के तीन से चार केस प्रतिदिन आ रहे हैं। इनमें 90 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं के गर्भ में वह थैली फट जा रही है, जिसमें शिशु तरल पदार्थ (एमनीओटिक फ्लूइड) में रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक जब तक इसकी जानकारी होती है, काफी देर हो जाती है। ऐसे में केस बिगड़ जा रहे हैं। कई बच्चों की मौत तक हो जा रही है। ऐसे में गर्भवतियों को विशेष सलाह दी जाती है कि वे साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला
केस- एक
शास्त्रीनगर की रहने वाली गर्भवती सुमित्रा को अचानक प्रसव पीड़ा हुई। परिजन इलाज के लिए महिला अस्पताल लेकर गए, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बीआरडी पहुंचने पर जांच की गई तो पता चला कि पानी की थैली दो दिन पहले ही फट गई थी। इसकी वजह से नवजात सेप्टिसीमिया का शिकार हो गया।
केस-दो
शाहपुर की रहने वाली गर्भवती गायत्री को डॉक्टरों ने अक्तूबर माह के अंत में प्रसव का समय दिया था। लेकिन, बीते बुधवार को ही उन्हें प्रसव पीड़ा हो गई। परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर गए। जहां पर डॉक्टरों ने जांच की पता चला बच्चा संक्रमण की चपेट में आ चुका है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई। नवजात सेप्टिसीमिया से पीड़ित मिला।
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डॉ. अवनीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला।
इन बीमारियों का भी खतरा
डॉ. अवनीश कुमार ने बताया कि सेप्टिसीमिया के अलावा गर्भवती महिलाएं मदर बोन या टार्च यानी टॉक्सोप्लाजमोसिस, रुबेल्ला, साइटोमैग्लोसिस वायरस की चपेट में भी आ रहीं हैं। इसकी वजह से गर्भस्थ शिशु के खून में संक्रमण हो रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि कई बार प्रसव के बाद गंदे कपड़ों में शिशुओं को लपेट कर रखना, बिना हाथ साफ किए ही शिशुओं को छूने पर भी सेप्टिसीमिया का खतरा रहता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
सेप्टिसीमिया के लक्षण
शरीर का तापमान बढ़ना और घटना। ठंड लगना और कंपकंपी होना। सांसे तेज होना। धड़कनें बहुत बढ़ जाना। बच्चे का स्तनपान न करना। सामान्य से कम यूरिन होना। उल्टी और दस्त। बच्चे का सुस्त होना।