देश में सिक्कों का चलन छठी शताब्दी ईसा पूर्व में शुरु हुआ था। उस समय इन्हें पुराण और पना भी कहा जाता था। भारत में जितने साम्राज्य हुए उतने ही अलग-अलग तरह के सिक्कों का अविष्कार हुआ यानी हर राजा के शासन काल के दौरान उस राजा द्वारा अपने साम्राज्य की प्रतिष्ठा वाले सिक्कों को चलाया गया। कभी लोहा, तांबा तो कभी चांदी, फिर सोना से होते हुए स्टील तक का सफर हजारों वर्षों में तय किया है।