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पिता और दो बहनों की आत्महत्या: मान्या वैज्ञानिक तो मानवी बनना चाहती थीं पायलेट, खुदकुशी से साथी भी हतप्रभ

Thu, 17 Nov 2022 04:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले के शाहपुर इलाके में आर्थिक तंगी की वजह से खुदकुशी करने वाली मान्या (16 वर्ष) और मानवी (14 वर्ष) पढ़ाई में होनहार थीं। दोनों ने सुनहरे भविष्य के सपने संजोए थे। बड़ी बहन आगे चलकर वैज्ञानिक बनना चाहती थी, वहीं छोटी का सपना पायलेट बनने का सपना था। दोनों परिवार की आर्थिक तंगी को दूर करना चाहती थीं। इसका जिक्र वो अक्सर अपने सहपाठियों और शिक्षकों के साथ करती थीं।  
 
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दो बेटियों संग पिता ने आत्महत्या कर लिया। - फोटो : अमर उजाला।
मां की कैंसर से मृत्यु और पिता के हादसे में पैर गंवाने और बाबा को सिक्योरिटी गार्ड रूप में कार्य करने की वजह से इन बच्चियों ने आर्थिक तंगी को काफी करीब से देखा था। शायद यही वजह थी कि वो घर की माली हालत को सुधारना चाहती थीं। स्कूल से घर आने के बाद भी दोनों बेहद अनुशासित थीं। थोड़ी देर आराम करने के बाद स्वाध्याय में जुट जाती थीं। रोजाना एक-दूसरे के पाठ्यक्रम को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित करती थीं। पूरा करने पर एक दूसरे का उत्साहवर्धन करती थीं।
 
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मान्या ने बाल दिवस पर स्कूल के कार्यक्रम में लिया था हिस्सा। - फोटो : अमर उजाला।
दोनों बहनों की अर्द्ध वार्षिक परीक्षाओं में भी अच्छे नंबर मिले थे। बड़ी बहन मान्या को अर्द्धवार्षिक परीक्षा में 86 फीसदी नंबर मिले थे। इनमें, गणित, विज्ञान, सोशल साइंस में 90 फीसदी से अधिक अंक थे। 40 नंबर की परीक्षा में अंग्रेजी में 34, हिंदी में 30, गणित में 36, विज्ञान में 37, सोशल साइंस में 34 और कंप्यूटर में 37 नंबर मिले थे।
 

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गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।
ऐसे ही छोटी बहन मानवी को 70 नंबर की परीक्षा के अंतर्गत अंग्रेजी में 63, हिंदी में 54, गणित में 27, विज्ञान में 55, सोशल साइंस में 49 और कंप्यूटर में 59 नंबर मिले थे। मगर, नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता समेत दोनों बहनों की खुदकुशी ने उनके पूरे परिवार और सपनों ने भी दम तोड़ दिया है।
 
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घर के बाहर जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
जिंदादिल थी बहनें, खुदकुशी से साथी भी हतप्रभ
मान्या और मानवी के निधन की सूचना मिलने के बाद उनके सहपाठी हतप्रभ हैं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि जिंदादिल और खुशमिजाज बहनों के मन में इतना दर्द भरा था। स्कूल के अंदर कभी उनके व्यवहार में ये तनाव या चिड़चिड़ापन उन्हें नजर नहीं आया। काश, उन्हें इसका अंदाजा होता तो शायद आज उनकी दोनों सहपाठी जिंदा होतीं।
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