कई साल की जद्दोजहद के बाद गोरखपुर जेल की चहारदीवारी से अलग कर बिस्मिल के स्मारक स्थल को आम लोगों के दर्शन के लिए खोला गया। लेकिन, इसका लाभ उनकी फांसी स्थल का दर्शन करने आने वालों को नहीं मिल रहा है, क्योंकि इस पर ताला लगा रहता है। पर्यटक स्थल के तौर पर इसे विकसित करने के लिए जिस सोच से इस कदम को उठाया गया था, उस पर लापरवाही का ताला लगा हुआ है।