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विश्व हृदय दिवस: दिल तो बच्चा है जी... बच्चा ही रहने दें, सिगरेट-तंबाकू से इसे बूढ़ा न करें

Thu, 29 Sep 2022 02:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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विश्व हृदय दिवस 2022 - फोटो : Istock
फिल्म इश्किया के गाने ‘दिल तो बच्चा है जी’ सुनकर सभी के जेहन में पके बालों वाले दिल से जवान नसीरूद्दीन शाह की तस्वीर घूम जाती है। अगर आप भी चाहते हैं कि बुढ़ापे तक आपका दिल भी साथ दे तो तुरंत सिगरेट और तंबाकू से दूरी बना लीजिए। क्योंकि तंबाकू और सिगरेट का सेवन करने वाले लगभग 20 प्रतिशत युवाओं का दिल जवानी में ही दगा दे रहा है। ये युवा धमनियों में ब्लॉकेज के कारण हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल सिंह ने बताया कि युवाओं में हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण तंबाकू और सिगरेट है। युवा इसे नजरअंदाज करते हैं। जबकि, तंबाकू और सिगरेट धीरे-धीरे हृदय पर असर करते हैं। इनके सेवन से शरीर की धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं। खून न पहुंचने से दिल का दौरा पड़ता है। ऐसे युवा मरीजों की संख्या मेडिकल कॉलेज में बढ़ती जा रही है।

 
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heart - फोटो : istock
जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित गुप्ता का कहना है कि हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यह बीमारी अब कम उम्र में भी काफी तेजी से हो रही है। इसलिए अब 25 साल के ऊपर के सभी लोगों को हाईपरटेंशन और डायबिटीज के स्क्रीनिंग की सलाह दी जा रही है। बताया कि बीमारी से बचने के लिए हर दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम और नियमित जांच जरूरी है। लोग इसे लेकर बेपरवाह हैं। हृदय रोग के प्रमुख कारण धूम्रपान, अत्यधिक वसा, शरीर में ज्यादा चर्बी, अत्यधिक चिंता, मधुमेह है। यही कारण है कि 30 से 35 प्रतिशत मौतें दिल की बीमारी (हार्ट अटैक) से हर साल जिले में हो रही है।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock
हर माह 50 से 60 युवा हो रहे हार्ट अटैक का शिकार
डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि युवा अगर अपने खान-पान और रहन-सहन पर ध्यान नहीं देंगे तो स्थितियां ज्यादा खराब होंगी। मौजूदा समय में हर माह 50 से 60 युवा मरीज हार्ट अटैक का शिकार होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इन मरीजों की उम्र 25 से 45 वर्ष के बीच है। इनमें तो कई ऐसे भी हैं, जिनको दूसरी बार अटैक आया है। यह ज्यादा चिंता का विषय है।

 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
रूमेटिक हार्ट डिजीज के भी मामले बढ़ रहे
डॉ. कुनाल सिंह ने बताया कि रूमेटिक फीवर के कारण रूमेटिक हार्ट डिजीज के मामले बढ़े हैं। सात से आठ फीसदी मरीज रूमेटिक हार्ट डिजीज के आ रहे हैं। खराब गला या लाल बुखार जैसे स्ट्रेप्टोकॉकस संक्रमण की वजह हार्ट वॉल्व को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे कर वाल्व खराब हो जाता और लोगों को हार्ट अटैक आता है। रूमेटिक फीवर एक इंफ्लेमेटरी रोग है, जो शरीर के कई कनेक्टिव टिश्यू को प्रभावित करते हैं, विशेषकर हृदय, जोड़ों, स्किन और मस्तिष्क को। इसलिए इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
...तो हो जाएं सतर्क
  • छाती में बाईं ओर या छाती के बीच में तेज दर्द अथवा दबाव महसूस हो।
  • सांस तेज चले, पसीना आए, ऐसा लगे कि किसी ने चारों ओर से छाती को बांध दिया हो।
  • छाती में दर्द के साथ पेट में जलन, पेट भारी लगना, उल्टी होना, शारीरिक कमजोरी और घबराहट होना।
  • मधुमेह के रोगियों को दर्द या बिना दर्द के भी हृदय आघात हो सकता है।
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