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लॉकडाउन से पहले यहां दिखता था 'जुहू चौपाटी' जैसा नजारा, देखिए अनलॉक के बाद कैसे बदल गई तस्वीर

Mon, 24 Aug 2020 11:31 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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रामगढ़ताल झील। - फोटो : राजेश कुमार
कोरोना महामारी के कुप्रभाव को लेकर देश में पहली बार 22 मार्च को एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया गया था। इसके बाद 25 तारीख को पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन लागू हो गया था। वहीं अब अनलॉक चल रहा है। आज हम आपको गोरखपुर के पहचान बन चुके एक खास स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लॉकडाउन के पहले गुलजार रहता था। वहीं अब विरान पड़ा हुआ है।
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रामगढ़ताल झील की लॉकडाउन से पहले की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर के रामगढ़ ताल की वजह से शहर की एक अलग ही पहचान बन गई है। इसे मुख्यमंत्री के शहर का जुहू चौपाटी कहा जा रहा है। यहां आम दिनों में हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं हालांकि लॉकडाउन की वजह से लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा था। जिससे यहां पूरी तरह सन्नाटा छाया रहता था। वहीं अब अनलॉक होने के बाद भी यहां लोगों को जाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण अभी भी विरान पड़ा है।
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रामगढ़ताल झील की अनलॉक के बाद की तस्वीर। - फोटो : राजेश कुमार।
इन दिनों रामगढ़ ताल के लहरों की अठखेलियां ताल की खूबसूरती को और बेहतर बना रही है। तापमान बढ़ने और लगातार सफाई होने की वजह से ताल में अब जलकुंभी काफी कम नजर आ रही है। सबसे खास बात यह है कि लोगों की आवाजाही न होने से ताल में गंदगी नहीं फेंकी जा रही और वह बिलकुल साफ सुथरा नजर आ रहा है।

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रामगढ़ताल झील। - फोटो : राजेश कुमार
ताल में अब नहीं दिख रहे हैं ठोस अपशिष्ट
रोजाना सैकड़ों की भीड़। खाने-पीने के 100 से ज्यादा ठेले खोमचे। भुट्टे से लेकर गोलगप्पों तक की दुकानों पर शाम का लुफ्त उठाते हुए लोगों से खचाखच भरे रहने वाले रामगढ़ ताल क्षेत्र में यह आम नजारा होता है, लेकिन इन दिनों यह पूरी तरह से बदला हुआ है ना तो रामगढ़ ताल के नजारों का लुत्फ उठाने के लिए लोग आ रहे हैं और ना ही कोई दुकानदार। इनकी वजह से ताल में जो ठोस अपशिष्ट तैरते हुए नजर आते थे, वो नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में पर्यटन के लिहाज से एक खास पहचान बन चुका रामगढ़ ताल का नजारा इन दिनों मनोहर नजर आ रहा है। गंदगी और कोलाहल से बिलकुल दूर।
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gorakhpur weather - फोटो : राजेश कुमार।
जलकुंभियों की बढ़ोतरी भी हो गई है कम
रामगढ़ ताल परियोजना प्रबंधन रतनसेन सिंह कहते हैं कि दरअसल ठंड के मौसम में जलकुंभियों बढ़ने की रफ्तार तेज होती है। उसे  ‘‘एल्गी बूम’’ कहते हैं। जबकि गर्मियों में इनकी रफ्तार काफी हद तक कम हो जाती है। इस वजह से अभी ताल के पानी में जलकुंभियों की मात्रा थोड़ी कम है। हालांकि कुछ स्थानों पर ताल के किनारे जलकुंभियां हैं, लेकिन मशीन से उनकी सफाई लगातार की जा रही है।
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