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मुगल स्थापत्य कला का शानदान उदारण है ये 350 साल पुरानी मस्जिद, देखें तस्वीरें

Tue, 02 Jun 2020 12:29 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
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Jama Masjid - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर शहर में तमाम मस्जिदें हैं लेकिन उर्दू बाजार में स्थित जामा मस्जिद की बात ही कुछ अलग है। ये मस्जिद मुगल स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। इसका निर्माण औरंगजेब के दूसरे पुत्र शाहजरदा मुअज्जम शाह ने लगभग 350 वर्ष पूर्व कराया था। मस्जिद आज भी मुगल सल्तनत के दास्तां को बयां करता है। मस्जिद की दरों-दीवार में मुगलिया सल्तनत की स्थापत्य कला पूरी तरह से रची-बसी है।
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Jama Masjid - फोटो : अमर उजाला।
बादशाह मुअज्जम शाह के नाम पर ही गोरखपुर का नाम मुअज्जमाबाद पड़ा था। उर्दू बाजार का भी निर्माण बादशाह मुअज्जम शाह ने करवाया। यहां पर मुगलिया सल्तनत की सेना रहती थी। लोगों की मांग पर जामा मस्जिद उर्दू बाजार के निमार्ण का आदेश बहादुर शाह प्रथम उर्फ मुअज्जम शाह ने दिया था। इसका निमार्ण फौज के चकलेदार या सूबेदार खलीलुर्रहमान के देखरेख से शुरू हुआ।

 
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Jama Masjid - फोटो : अमर उजाला।
इन्हीं खलीलुर्रहमान के नाम पर खलीलाबाद शहर का नाम रखा गया। उस समय राप्ती नदी इस मस्जिद की बगल से बहती थी। जिसके कारण इसकी नींव को लंबे क्षेत्रफल में बनाया गया। इस मस्जिद की चौड़ाई उत्तर से दक्षिण 90 फीट पूरब पश्चिम करीब 80 फीट है। मस्जिद के तीन गुबंद अपनी भव्यता की जीती जागती निशानी है। वहीं मीनार व दरों दीवार पर मुगलिया नक्काशी दिलकश है। मस्जिद का दरवाजा भी अपनी शान को बयां करता है। मस्जिद चारों तरफ से खुला हुआ है।
 

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- फोटो : amar ujala
छह सौ लोग एक साथ अदा करते हैं नमाज
जामा मस्जिद में एक बार में करीब छह सौ से अधिक लोग एक साथ नमाज अदा करते हैं। वहीं जुमा, अलविदा, ईद, ईद-उल-अजहा में यहां पर करीब पांच हजार लोग नमाज अदा करते हैं।
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Jama Masjid - फोटो : अमर उजाला।
जामा मस्जिद की देखरेख में हैं सात मस्जिदें
जामा मस्जिद के देखरेख में सात और मस्जिदें है। जिसमें संगी मस्जिद, सौदागार मोहल्ला, हांसूपुर, अखाड़े वाली मस्जिद, हाल्सीगंज की मस्जिद, महराजगंज जिले की जामा मस्जिद, मस्जिद मुसाफिर खाना शामिल हैं। मस्जिद के इमाम अब्दुल जलील चार पीढ़ियों से इस मस्जिद की सेवा कर रहे हैं।
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