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तस्वीरें: भारतीय संस्कृति में ढल गया है ये फ्रांसीसी परिवार, इनकी भोजपुरी भाषा बनी है आकर्षण का केंद्र

Sat, 18 Jul 2020 03:55 PM IST
vivek shukla संजय कुमार पांडेय, महराजगंज।
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france Family - फोटो : अमर उजाला।
फ्रांस के टूलूज शहर का फ्रांसीसी परिवार इन दिनों भारतीय संस्कृति में धीरे-धीरे ढलता जा रहा है। चाहे भोजपुरी में बोलना हो या फिर गांव के लोगों के साथ घुलमिलकर बातें करना, विदेशी परिवार को अच्छा लगने लगा है। अब तो विदेशी मेहमान मंदिर के बरामदे में जमीन पर बैठकर हर रोज भोजन करता है। विदेशी मेहमान की बातें, व्यवहार लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
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गांव के लोग इनके मुंह से भोजपुरी सुनकर खुश हो जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला।
भोजपुरी में इस विदेशी परिवार की टूटी-फूटी भाषा सुनकर गांव के लोग हंसने के साथ ही फक्र भी करते हैं। लॉकडाउन के बाद से ही यह फ्रांसीसी परिवार कोल्हुई थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोल्हुआ उर्फ सिहोंरवा शिव मंदिर में रह रहा है।
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टॉम गांव के बच्चों के साथ दिनभर साईकिल से घूमता है। - फोटो : अमर उजाला।
पैट्रीस पैलेरस, उनकी पत्नी वर्गिनी पैलेरस, उनकी दो बेटियां ओफिली पैलेरस व लोला पैलेरस तथा बेटा टॉम पैलेरस हर रोज मंदिर में जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं। आज के आधुनिक युग में विदेशी मेहमानों की यह गतिविधि लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर के पुजारी बाबा हरिदास के भंडारे में शुद्ध शकाहारी भोजन इन सभी लोग बेहतर ढंग से परोसा जाता है।

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गांव में घूमती लोला पैलेरस। - फोटो : अमर उजाला।
बाबा के मुताबिक फ्रांसीसी परिवार को शाकाहारी भोजन अच्छा लगता है। दाल, चावल, सब्जी, रोटी, दूध प्रमुख रूप से भोजन में शामिल रहता है। बाबा उदराज बताते हैं कि लंबे समय से रहने के कारण विदेशी मेहमानों को भोजपुरी भी बोलने के साथ समझ में आने लगा है। जिससे वह गांव के लोगों से घुल मिलकर बातें करते हैं।
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मंदिर के प्रांगण में रहता है फांसीसी परिवार। - फोटो : अमर उजाला।
ग्राम प्रधान पुत्र योगेंद्र सहानी कहते हैं कि फ्रांसीसी परिवार को अच्छी सुविधा मिल रही है, जिससे उन्हें होटल या गेस्ट हाउस पसंद नहीं आ रहा है। गवई संस्कृति के बीच लोगों के साथ रहना उन्हें अच्छा लगा रहा है। गांव के लोग भी अतिथि देवो भवः की परंपरा का अनुशरण करते हुए उनकी हर संभव मदद करते हैं।
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लॉकडाउन के कारण फंसा है परिवार। - फोटो : अमर उजाला।
ऐसे पहुंचे शिव मंदिर तक
फ्रांस के टूलूज शहर से जुलाई 2019 को 24 देशों की यात्रा पर निकले। यूरोप, तुर्की, जार्जिया, ओमेनिया, ईरान, दुबई, अमीरात, यूएई, ओमान से पाकिस्तान होकर एक मार्च 20 को बाघा बार्डर होते हुए भारत पहुंचे। जिन्हें भारत के विभिन्न स्थानों के भ्रमण के बाद नेपाल जाना था। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते देश में लॉकडाउन व नेपाल सीमा सील होने के कारण वह नेपाल नहीं जा सके।

 
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फ्रांसीसी परिवार की मदद पूरा गांव करता है। - फोटो : अमर उजाला।
अभी यहां जाने की इच्छा
वर्गिनी पैलेरस ने बताया कि भारत भ्रमण के बाद नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड, लाऊस व कंबोडिया का भ्रमण करना है। नेपाल सीमा सील होने के कारण मंदिर में रहना ठीक है। मंदिर में पूरे परिवार के साथ जमीन पर बैठकर भोजन करना काफी अच्छा लगता है।
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बच्चों के साथ ओफिली पैलेरस। - फोटो : अमर उजाला।
गाइड की भूमिका में रहते हैं संजय
कोल्हुआ गांव के संजय यादव को अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी है। जिससे यह फ्रांसीसी परिवार के करीब हैं। संजय ने बताया कि विदेशी मेहमान अब भोजपुरी भी समझने लगे हैं। अगर उनको कुछ समझने में परेशानी होती है, तो उन्हें बताता हूं। फ्रांसीसी परिवार के सभी सदस्य संजय को अपना दोस्त मानते हैं।
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