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4.5 अरब साल पहले जब सौरमंडल का निर्माण हुआ तो कई ऐसे खगोलीय पिंड थे जो ग्रह का आकार नहीं ले सके। खरबों की संख्या में ये खगोलीय पिंड मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच स्थित खगोलीय बेल्ट में पाए जाते हैं। अपने अनियमित आकार में ग्रहों से छोटे और उल्का पिंडो से बड़े होने की वजह से इन्हें हम छोटे ग्रहीय खगोलीय पिंड भी कह सकते हैं। ये भी सौरमंडल में दूसरे ग्रहों की तरह सूर्य के चक्कर लगाते हैं। ये प्राय: तीन प्रकार के होते है। सी टाइप, एस टाइप और एम टाइप। 29 अप्रैल वाला खगोलीय पिंड एस टाइप का है। इनके पृथ्वी से टकराने की संभावना 20 मिलियन सालों में एक बार बनती है।