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अजीबो-गरीब: चूहों ने रेलवे पटरियों से बदला अपना 'आशियाना', अब यहां कर रहे निवास

Tue, 13 Oct 2020 08:39 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर चूहों का आतंक रहता है। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां रेलवे स्टेशन की पटरियों से चूहों ने अपना आशियाना बदल दिया है, सुनकर थोड़ी हैरानी जरूर हुई होगी लेकिन यह बात सच है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, लॉकडाउन में रेलवे स्टेशन से गायब चूहों की तादाद फिर बढ़ने लगी है। इस बार चूहों ने अपना ठिकाना भी बदल दिया है। पटरियों से ज्यादा चूहे अब दफ्तरों में बस गए हैं। 10 से 15 चूहे रोजाना मारे जा रहे हैं। इन्हें मारने के लिए रेल प्रशासन करीब सात लाख रुपये सालाना खर्च करता है।
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गोरखपुर रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला।
लॉकडाउन में ट्रेनों का संचालन बंद होने से चूहों को जंक्शन और पटरियों पर खुराक नहीं मिली। ऐसे में अधिकतर चूहे मर गए, जो बच गए, उन्होंने अपना ठिकाना बदल दिया। इससे रेल प्रशासन ने राहत की सांस ली थी, लेकिन ट्रेनों का संचालन शुरू होने के साथ ही यह समस्या फिर खड़ी हो गई है।

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Gorakhpur Railway station - फोटो : अमर उजाला
चूहों ने इस बार पटरियों के बजाए दफ्तरों को अपना ठिकाना बना लिया है। ये सर्वाधिक नुकसान पार्सल और अमानती सामान घर में कर रहे हैं। रेलवे ने दो साल के लिए चूहों को मारने का ठेका दे रखा है। इसमें दवाइयां, मैन पावर और चूहों के बिल को बंद करने का काम होता है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तीन शिफ्ट में काम करते हैं कर्मचारी
गोरखपुर जंक्शन पर चूहों को मारने का ठेका लेने वाले ठेकेदार आरपी मिश्रा ने बताया कि चूहों को मारने के लिए तीन शिफ्ट में एक-एक कर्मचारी की रोजाना ड्यूटी लगती है। पटरियों पर अभी चूहे कम हैं। इनका ठिकाना अब दफ्तर हो गया है। केमिकल के जरिए रोजाना 10 से 15 चूहे मारे जाते हैं।

रेलवे प्रशासन बढ़ा सकता है रकम
मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक ने बताया कि पेस्टीसाइड के काम का बजट बढ़ाने की योजना पर विचार चल रहा है। अब इसे 75 हजार रुपये महीने किया जा सकता है। ठेकेदार से दो साल का अनुबंध था, जो अक्तूबर में समाप्त हो रहा है।
 
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