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वेटलैंड घोषित होने के बाद और सुरक्षित हो जाएगा 'रामगढ़ताल', आसपास के इन कामों पर लगेगी रोक

Tue, 15 Sep 2020 03:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रामगढ़ताल। - फोटो : राजेश कुमार।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रामगढ़ताल वेटलैंड की प्रारंभिक अधिसूचना पर 206 लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। सभी का निस्तारण कर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की अध्यक्षता वाली जिला आद्रभूमि प्राधिकरण ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। इस कवायद के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल होने की वजह से जिले से रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर भी आगे की कार्रवाई तेज हो गई है। जल्द ही ताल के वेटलैंट का फाइनल प्रकाशन हो जाने की उम्मीद है। 
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रामगढ़ताल। - फोटो : राजेश कुमार।
वेटलैंड से जुड़ी प्रारंभिक अधिसूचना की रिपोर्ट के मुताबिक रामगढ़ताल किनारे बसे सैकड़ों लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। ताल के किनारे गाटा वार 28 स्थानों पर वेटलैंड का दायरा निर्धारित किया गया है। इनमें से सर्वाधिक 22 स्थानों पर वेटलैंड का दायरा सिर्फ 50 मीटर है। सिर्फ एक स्थान पर 119 मीटर, चार स्थानों पर 100 मीटर और एक अन्य स्थान पर दायरा 80 मीटर का है। हालांकि रामगढ़ताल वेटलैंड के दायरे को लेकर मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी चल रहा है। एनजीटी की हाई पावर कमेटी ने पिछले साल ताल के 500 मीटर दायरे में हुए सभी निर्माणों को ध्वस्त करने की संस्तुति भी की है।
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रामगढ़ताल। - फोटो : राजेश कुमार।
10 हजार घरों से टल सकता है खतरा
रामगढ़ताल के जिस पांच सौ मीटर दायरे में आने वाले सभी निर्माण ध्वस्त करने की एनजीटी की हाई पावर कमेटी संस्तुति कर चुका है। उस क्षेत्र का जीडीए ने सर्वे कराया था। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इस दायरे में करीब 10 हजार मकान हैं। इनमें से करीब पांच हजार घर तो जीडीए के ही हैं। 500 के करीब ऊंची इमारतें हैं । ऐसे में वेट लैंड का दायरा ज्यादातर जगहों पर 50 मीटर होने से इन घरों में रहने वाले हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।

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गोरखपुर शहर। - फोटो : राजेश कुमार
15 जून को जारी हुई अधिसूचना, आगे की कार्रवाई ऐसे होगी
रामगढ़ताल वेटलैंड को लेकर 15 जून को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण ने लोगों को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 जून तक का मौका दिया था। इस दौरान करीब  206 दावे और आपत्तियां मिलीं। डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने सभी की सुनवाई के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दिया है। 30 सितंबर तक प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के रिपोर्ट की समीक्षा कर लेने की उम्मीद है। इस प्राधिकरण की मंजूरी के बाद रिपोर्ट फिर से जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण को भेजी जाएगी। जिला आद्रभूमि प्राधिकरण अंतिम अधिसूचना का ड्राफ्ट तैयार कर फिर शासन को भेजेगा। न्याय विभाग होते हुए यह ड्राफ्ट अंतिम प्रकाशन के लिए राज्यपाल के पास जाएगा जिसके बाद ताल के वेटलैंड का अंतिम प्रकाशन होगा।
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रामगढ़ताल। - फोटो : राजेश कुमार।
वेटलैंड घोषित होने के बाद और सुरक्षित हो जाएगा रामगढ़ताल
डीएफओ अविनाश कुमार कहते हैं कि रामगढ़ताल के वेटलैंड के रूप में अधिसूचित होने के कई लाभ होंगे। ताल अपने मूल स्वरूप में बना रहेगा। आसपास के भूगर्भ जल का स्तर सुधरेगा। झील में मिलने वाली वनस्पतियां कार्बन का अवशोषित करेंगी ही जैव विविधता का संरक्षण और संवर्धन भी होगा। यही नहीं रामगढ़ताल, प्रदेश का पहला अधिसूचित वेटलैंड होगा।
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रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
ताल के आसपास इन कामों पर लगेगी रोक
अधिसूचना के बाद झील के निर्धारित दायरे में कोई नया उद्योग नहीं लग सकेगा। पुरानी इकाइयों के विस्तार पर रोक होगी। इस दायरे में खतरनाक किस्म के कचरे, पॉलीथिन, नान बायोग्रेडिबल ठोस कचरे, गंदा पानी, अशोधित सीवेज के निस्तारण पर भी रोक होगी। नौकायन के लिए जेट्टी को छोड़कर किसी तरह के निर्माण पर रोक होगी। बंधे का निर्माण, मछली पालन, सिंघाड़े की खेती, सड़क निर्माण आदि की गतिविधियों को डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति रेगुलेट करेगी।
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