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तस्वीरें: अमेजन नदी से मंगाई गई थी ये खूबसूरत पत्तियों वाली जलकुंभी, जानिए अब क्यों बनी मुसीबत

Fri, 09 Apr 2021 02:25 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
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रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
इन दिनों पूर्वांचल के जुहू चौपाटी के नाम से जाना जाने वाले रामगढ़ताल की खूबसूरती को जलकुंभी ग्रहण लगा रही है। लेकिन शायद यह कम ही लोगों को पता होगा कि इस जलकुंभी को सबसे पहले बंगाल में दक्षिणी अमेरिका में बहने वाली नदी अमेजन से लाई गई थी। कालांतर में यह देश के तकरीबन सभी हिस्सों में फैल गया और आज इसे बंगाल के आतंक के नाम से जाना जाता है।
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रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
जलकुंभी पानी में तैरने वाला एक प्रकार का पौधा है जो मूलत: अमेजन का है लेकिन अब पूरे विश्व में फैल गया है। जलकुंभी सबसे पहले भारत में बंगाल में अपने खुबसूरत फूलों और पत्तियों के आकार के कारण लाया गया था।
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रामगढ़ताल - फोटो : अमर उजाला।
भारत में जलकुंभी को बंगाल का आतंक (Terror Of Bengal) भी कहा जाता है। यह पौधा रुके हुए जल में सार्वाधिक वृद्धि करता है जो जल से ऑक्सीजन खीच लेता है। जिसके परिणाम स्वरूप मछलियां मर जाती हैं।

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रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि जलकुंभी बहुत तेजी से फैलने वाला खरपतवार है। यह जैव विविधता ह्रास का भी एक कारण है जो अनेक जलीय प्रजातियों को अपनी उपस्थिति के कारण नष्ट कर देता हैं। यह कायिक प्रवर्धन तीव्र गति से होता है जो अल्प समय में ही संपूर्ण जलाशय मे फैल जाता है और उसे ढक देता है।
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रामगढ़ताल - फोटो : अमर उजाला।
जलकुंभी से छुटकारा पाना बहुत कठिन है, लेकिन यह इस मायने में उपयोगी है कि उद्योगों से निकलने वाले दूषित एवं हानिकारक को शोषित करके जल प्रदुषण को रोकने मे प्रभावी होता है।
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