श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान झारखंड, बिहार और बंगाल से आने वाले कारसेवकों का केंद्र गोरखपुर ही रहा। यहीं से आगे की रणनीति तैयार करके उन्हें भेजा जाता था। यही वजह है कि विहिप के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आचार्य गिरिराज किशोर, विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल, चंपत राय, बजरंग दल के प्रमुख विनय कटियार यहां बैठकें कर कार्यकर्ताओं में जोश भरते रहे और आंदोलन की रणनीति तैयार किया। गोरखपुर में तत्कालीन प्रांत संगठन मंत्री सूबेदार सिंह की भी गिरफ्तारी शंकर भवन, संघ कार्यालय से हुई थी।