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खुद के भट्ठे की ईंट से रेलवे ने बनाई थी खास बिल्डिंग, आज भी देख सकते हैं इसके अवशेष

Fri, 29 Jan 2021 04:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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Railways brick - फोटो : अमर उजाला।
सोचिए कि 220 वर्ष पुरानी ईंट कैसी होगी, उसका आकार-प्रकार किस तरह का रहा होगा। ऐसी ईंट देखनी है तो गोरखपुर रेल म्यूजियम जरूर जाएं। यहां अंग्रेजों के ईंट भट्ठे पर तैयार की गई पुरानी ईंट रखीं गईं हैं।  खास बात यह कि इसमें कई ईंट गोरखपुर रेलवे स्टेशन परिसर में बने अपूर्वा बिल्डिंग में लगीं थीं, जिसे पिछले वर्ष गिरा दिया गया।
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रेल म्यूजियम - फोटो : Social media
रेल म्यूजियम में रखीं गईं ईंट सन् 1800, 1883, 1896 व 1900 में निर्मित है। यह ईंट भी वजन में वर्तमान समय की ईंट से दोगुनी है और मोटाई 4 इंच है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि अंग्रेजों के शासनकाल में रेलवे का अपना ईंट भट्ठा होता था। गोरखपुर में भी अंग्रेज अफसरों ने भट्ठे की ईंट से एक खास बिल्डिंग बनवाई थी। जिसे बाद में अर्पूवा रेस्टोरेंट एंड कॉफी हाउस का नाम दिया गया। स्टेशन के सुंदरीकरणा के क्रम में इस बिल्डिंग को अब गिरा दिया गया है, इसमें से निकली ईंट 1921 से लेकर 1948 तक की हैं और इनका वजन चार से पांच किलो है। ईंटों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए कुछ ईटों को रेल म्यूजियम में रखवा दिया गया है।

 
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Railways brick - फोटो : अमर उजाला।
अब उस जगह बना है पार्क
कॉफी हाउस की जमीन पर बच्चों के खेलने के लिए पार्क बनाया गया है। काफी हाउस का भवन जर्जर हो गया था इसलिए उसे गिरा दिया गया। यहां बनने वाले पार्क में चकरी, झूला सहित कई अन्य संसाधन भी लगेंगे। इसमें लोगों के सुबह-शाम टहलने की भी व्यवस्था होगी।

 

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Railways brick - फोटो : अमर उजाला।
कॉफी हाउस का डोसा था मशहूर, बड़े नेता चखते थे स्वाद
रेलवे स्टेशन के जनरल क्लास गेट के सामने बने अपूर्वा रेस्टोरेंट कॉफी हाउस का इडली और डोसा बहुत मशहूर था। लोग दूर-दूर से सिर्फ इसका जायका लेने आते थे। गोरखपुर के प्रबुद्ध, राजनीतिक और शिक्षाविदों के संवाद के लिए यह कॉफी हाउस सबसे मुफीद जगह थी। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, मधुकर दीघे, माधव राव सिंधिया, बलराम जाखड़ जैसे दिग्गज नेता कॉफी के साथ ही डोसा और इडली का स्वाद ले चुके हैं।

 
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
1921 से 1948 तक की ईंटें
कॉफी हाउस से जो ईंटें निकल रही हैं वह 1921 से लेकर 1940 तक की हैं। जो ईंटें निकल रही हैं उन सभी में सन और रेलवे का नाम अंकित है। उस दौरान कंपनी रेलवे हुआ करती थीं।

साल                   रेलवे का नाम
1921   बीएनडब्ल्यूआर बंगाल एंड नार्थ वेस्टर्न रेलवे
1929   बीएनडब्ल्यूआर बंगाल एंड नार्थ वेस्टर्न रेलवे
1930   बीएनडब्ल्यूआर बंगाल एंड नार्थ वेस्टर्न रेलवे
1947  आरएनएस
1948  ओटीआर अवध एंड तिरहुत रेलवे
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