गुरु गोरखनाथ के शिष्य व नाथ परंपरा के वाहक योगी अलग-अलग समय में समाज में सुर्खियां बटोरते रहे हैं। पंजाब में पैदा रांझा भी हीर के विरह में योगी बन गए थे। दीक्षा लेने के बाद गुरु से कहा था कि मैं संसार में एक स्त्री से प्रेम करता हूं, मैंने उसकी प्राप्ति के लिए योग मार्ग अपनाया है। यदि इस बात का पता होता कि योगी के लिए प्रेम करना पाप होता है तो यहां कभी नहीं आता। पंजाब के लोक मानस और नाथ संप्रदाय के लोक कहानियों में हीर रांझा के किस्से दर्ज हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...