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यूपी चुनाव 2022: पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है यह मठ, यहां संत से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर कर चुके हैं लोग

Sat, 15 Jan 2022 02:42 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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बाबा गोरखनाथ की आरती करते सीएम योगी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सीएम योगी गोरखपुर सदर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में वह जिस मठ से जुड़े हैं, उस मठ का अपना अलग महत्व है। मुख्यमंत्री योगी गोरखनाथ मठ के गोरक्षपीठाधिश्वर हैं। क्या आप जानते है कि इसी मठ के कारण उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर का नाम पड़ा। यूपी के चुनाव में गोरखनाथ मंदिर की खास भूमिका है।

 
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बाबा गोरखनाथ। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मंदिर गुरु गोरक्षनाथ की तप स्थली है। वे कांगड़ा स्थित ज्वाला देवी के दरबार से भ्रमण करते हुए यहां आए थे। यहां रूककर उन्होंने धूनी रमाई तो यहीं के होकर रह गए। यह धूनी आज मंदिर में जल रही है। बता दें कि 52 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ गोरक्षपीठ धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में समय-समय पर अहम योगदान देता रहा है। नाथ पंथ की योग परंपरा के कारण यह पीठ पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

 
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गोरखनाथ मंदिर। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
मंदिर के सचिव द्वारका तिवारी बताते हैं कि हिमालय के अनेक तीर्थों का भ्रमण करते हुए गुरु गोरखनाथ कांगड़ा में ज्वाला देवी के दरबार पहुंचे तो देवी ने उन्हें अपने वहां भोजन के लिए आमंत्रित किया। तब गुरु गोरखनाथ ने कहा कि देवी मैं योगी हूं। भिक्षाटन करके जो लेकर आता हूं, उसे ही बनाकर खाता हूं। यहां पर बलि दी जाती है। यहां पर भोजन नहीं कर सकता हूं। आप पानी गरम कीजिए मैं खिचड़ी मांग कर लाता हूं। यह कह कर गुरु गोरखनाथ वहां से निकले और चलते हुए गोरखपुर आ गए, यहां पर उस समय चारों तरफ जंगल था। गुरु गोरखनाथ ने यहां पर धूनी रमा दी और यहीं के होकर रह गए।

 

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गोरखनाथ मंदिर में पूजा करते मुख्यमंत्री योगी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मंदिर का रूप आकार प्रकार, समय-समय पर परिस्थितियों और सुविधाओं के अनुसार बदलता रहा है। शिव गोरक्ष की ओर से त्रेता युग में अखंड ज्योति जलाई गई थी, जो आज तक अखंड रूप से जल रही है। यह अखंड ज्योति गोरखनाथ मंदिर के अंतरवर्ती भाग में हैं। मंदिर में ही गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ है। इसमें विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क रहने, भोजन व अध्ययन की पूरी व्यवस्था हैं। एक आयुर्वेद महाविद्यालय व धर्मार्थ चिकित्सालय, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् स्थापना की गई। परिषद् की ओर से कई हॉस्टल भी खोले गए हैं।

 
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मंदिर के महंत गुरु गोरखनाथ के प्रतिनिधि के रूप में सम्मानित होते हैं। इस मंदिर के प्रथम महंत श्रीवरदनाथ जी महराज कहे जाते हैं। तब से यह मंदिर राजनीति और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र हो गया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन तो अवेद्यनाथ ने रामजन्म भूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। अब महंत आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनकर अलग पहचान बनाई है। महंत अवेद्यनाथ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ 1998 में सांसद बने थे, इसी के साथ उन्होंने सबसे कम उम्र में सांसद बनने की उपलब्धि भी अपने नाम की।
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