कोरोना संकट गहराने के साथ ही पिछले साल से पेंशनरों का बंद हुआ महंगाई भत्ता अब तक बहाल नहीं हुआ है। इसको लेकर पेंशनरों में गहरा आक्रोश है। वे कहते हैं कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है, हम ही जानते हैं कि परिवार का खर्च कैसे चल रहा है। ऐसे मुश्किल समय में हम पेंशनरों के लिए एक रुपया भी बड़े काम काहै, लेकिन सरकार हमारी सुधि ही नहीं ले रही। अमर उजाला से अपनी समस्याएं साझा करते हुए पेंशनरों ने महंगाई भत्ता बहाल नहीं होने पर आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना है कि सरकार पेंशनरों को लेकर थोड़ी भी संजीदा नहीं है। वरना महंगाई भत्ता बंद करने का निर्णय ही नहीं हुआ होता। पेंशनरों ने कहा कि जनवरी 2020 से लेकर अभी तक महंगाई भत्ता बंद रखने से उनके सामने आर्थिक संकट गहराता चला जा रहा है। बजट में आस थी कि महंगाई भत्ता बहाल हो जाएगा, मगर सरकार ने चुप्पी साध ली।
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डॉ. जेपीएल श्रीवास्तवा।
- फोटो : अमर उजाला।
पेंशन से ही कई घरों का जलता है चूल्हा
राजकीय पेंशनर्स प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. जेपीएल श्रीवास्तव ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे पेंशनर हैं, जिनकी पेंशन से ही उनके घर का खर्च चलता है, लेकिन सरकार एक साल से पेंशनरों का महंगाई भत्ता बंद किए हुए है। इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि पेंशनरों के भत्तों आदि में कटौती हुई हो। पहले 17 फीसदी महंगाई भत्ता मिलता था। जनवरी 2020 में चार, जुलाई में 3 और जनवरी 2021 में करीब पांच फीसदी बढ़ोत्तरी हुई यानी अब तक 28 फीसदी महंगाई भत्ता मिलता। मगर सरकार इसे दबाए बैठी है और पेंशनर परेशान हैं। जल्द भत्ता बहाल नहीं हुआ तो पेंशनर आंदोलन करेंगे।
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शिवानंद श्रीवास्तव।
- फोटो : अमर उजाला।
मुश्किल हो रहा परिवार चलाना, उदासीन हो गई है सरकार
सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी शिवानंद श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार पूरी तरह से उदासीन हो गई है। महंगाई भत्ता पेंशनरों का अधिकार है। पिछले साल से ही यह भत्ता बंद कर सरकार ने लाखों परिवारों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सरकार को सोचना चाहिए कि आखिर एक बुजुर्ग अपने इलाज और परिवार का खर्च कैसे चलाएगा ? आवश्यक जरूरतों के लिए भी जूझना पड़ रहा है। महंगाई बढ़ती जा रही है, मगर सरकार न महंगाई भत्ता दे रही, न ही बढ़ा हुआ एरियर। सफाई कर्मियों जैसे बहुत से लोअर कर्मचारियों की लंबे से एसीपी नहीं लगी। सरकार को बुजुर्गों की फिक्र ही नहीं रह गई है।
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इम्तियाज अहरारी।
- फोटो : अमर उजाला।
बहुत इंतजार हुआ, अब कोर्ट का ही दिख रहा है सहारा
शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी इम्तियाज अहरारी ने बताया कि बुजुर्गों के लिए एक-एक रुपये बहुत कीमती हैं। तमाम पेंशनरों की पेंशन पर ही उनका पूरा घर निर्भर है। महंगाई भत्ता बंद कर देने से पेंशन की रकम में अच्छी खासी कटौती हो गई। ऐसे में परिवार चलाना अब मुश्किल हो रहा है। साल भर हो गए, सरकार को यह नहीं सूझ रहा कि आखिर बुजुर्ग अपना परिवार कैसे चलाएंगे। अब तो पैदल चलने में भी मुश्किल होती है। ऐसे में बुजुर्ग कैसे बाहर निकलकर अपने हक के लिए दर-दर माथा पटकें। सरकार को देख लिया, अब सिर्फ कोर्ट का ही एक सहारा दिख रहा है। वहीं याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहा हूं।
पेंशनर-कर्मचारियों का एक सवाल, कब बहाल होगा भत्ता
उप्र कोषागार कर्मचारी संघ के अपर महामंत्री अश्वनी श्रीवास्तव ने बताया कि कोषागार का प्रतिनिधि होने की वजह से रोजाना दफ्तर आने-जाने वाले सैकड़ों पेंशनर, कर्मचारी मुझसे एक ही सवाल पूछते हैं कि आखिर महंगाई भत्ता कब बहाल होगा ? इसका जवाब दे पाने में मैं ही नहीं, हर कर्मचारी नेता असमर्थ है। सरकार ने जुलाई 2021 में भुगतान करने की बात कही थी, मगर अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिख रहे, जिससे यह भरोसा किया जा सके कि जुलाई में भुगतान हो जाएगा। यूं तो महंगाई भत्ता हर कर्मचारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, मगर पेंशनरों के लिए बड़ा सहारा है। भत्ता बंद होने से उनके सामने कई तरह की दिक्कतें खड़ी हो गई हैं।