NIA latest news: एनआईए की जांच के बीच बैंकॉक के पन्नेलाल यादव की बेटियों ने ये माना है कि पापा के कहने पर अनीता दीदी के खाते में रुपये भेजे थे। एनआईए के पास भी पूरी पुख्ता जानकारी है कि अनीता और बैंकॉक में रहने वाले पन्नेलाल यादव एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं।
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पन्नेलाल यादव के बेटे और बेटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
Anita Singh NIA investigation: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम ने पाकिस्तान को गोपनीय सूचनाएं देने की आरोपी महिला के खाते में रुपये भेजे जाने के मामले में शनिवार को खजनी और शहर के तारामंडल इलाके में छापा मारा। जांच के दौरान पता चला कि महिला अनीता सिंह के खाते में तारामंडल निवासी और बैंकॉक में कारोबारी पन्ना यादव के बेटे अमन यादव और बेटी ने रुपये भेजे थे।
एनआईए की जांच के बीच बैंकॉक के पन्नेलाल यादव की बेटियों ने ये माना है कि पापा के कहने पर अनीता दीदी के खाते में रुपये भेजे थे। एनआईए के पास भी पूरी पुख्ता जानकारी है कि अनीता और बैंकॉक में रहने वाले पन्नेलाल यादव एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं।
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जांच करने घर के अंदर जाती एनआईए की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी वजह से जांच के बात बातचीत में पन्ने की बेटी ने अनीता को दीदा बोलते हुए अपनी बात कही। एनआईए सूत्रों की मानें को मामले में अनीता ही संदिग्ध है। पाकिस्तान को सूचनाएं देने के बदले अनीता के खाते में पाक से भी रुपये भेजे गए थे। इसी खाते में गोरखपुर से 15 हजार रुपये भेजे जाना पर एनआईए की टीम 12/2025 एनआईए एक्ट में दर्ज केस की जांच करने गोरखपुर पहुंची थी।
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घर के बाहर खड़ी गाड़ियां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पाकिस्तान को सूचनाएं उपलब्ध कराने के बदले लेनदेन के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम की पूछताछ में अमन के बयान से सवाल उलझ गए हैं। बैंकॉक निवासी पन्नेलाल यादव के बेटे अमन ने एजेंसी को बताया कि घर के बगल में जीडीए कॉम्प्लेक्स में चाय की एक दुकान पर उसने और बहन ने किसी के कहने पर अनीता सिंह के खाते में 15 हजार रुपये भेजे थे।
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पन्नेलाल का आवास
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हालांकि, उन्होंने चाय की दुकान के मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। बीते दिनों पाकिस्तान को सूचनाएं देने के बदले गुजरात के किसी अनीता सिंह के खाते में लेनदेन के मामले में एनआईए की टीम ने बैंकॉक निवासी पन्नेलाल यादव के खजनी और शहर स्थित मकान पर पहुंचकर जानकारी जुटाई थी। उधर, परिवार के सदस्यों का दावा है कि जब उन्होंने कोई गलती नहीं की है तो कोई भी जांच हो, वे सहयोग को तैयार हैं।
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पन्नेलाल के भतीजे ने एनआईए के अधिकारियों पर आरोप लगाया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजनों ने बताया कि चाय की दुकान विकास नाम के युवक की थी, लेकिन अब दुकान बेचकर वह कहीं और चला गया है। हालांकि विकास या उसके घर परिवार के संबंध की जानकारी भी परिवार के किसी सदस्य को नहीं है। परिजनों के मुताबिक, चार जनवरी की दोपहर में विकास नाम के युवक की दुकान पर पन्नेलाल का बेटा अमन यादव गया था। वहां कोई उससे मिला और कहा कि उससे नकद लेकर 15 हजार रुपये एक नंबर पर गूगल पेमेंट कर दे।
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गोरखपुर घर के बाहर मौजूद पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजनों ने बताया कि अमन ने नंबर लिया और 10 हजार रुपये अपने बैंक खाते और पांच हजार अपनी बहन के खाते से भेजे थे। एनआईए सूत्रों ने बताया कि टीम इस जवाब से असंतुष्ट है। टीम इसे संयोग नहीं मान रही है। टीम का तर्क है कि किसी अंजान खाते में सहयोग के तौर पर 10 हजार रुपये अमन ने भेजा तो बहन के मोबाइल नंबर से लिंक बैंक का खाता और गूगल पेमेंट उसी वक्त अमन के पास आ गया, क्या यह भी एक संयोग था।
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पन्नेलाल यादव का गांव का मकान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एजेंसी के सूत्रों की मानें तो जांच टीम ने मौके पर अमन से पूछा तो वह चाय की दुकान और अन्य बातें बोलकर बचने की कोशिश कर रहा था। सख्ती से पूछताछ और अनीता के नंबर पर अमन के मोबाइल नंबर से भेजी गई रकम दिखाई गई तो अमन फिर थोड़ा सहम गया। इसी के बाद उसने मोबाइल से संचालित अपने गूगल पेमेंट एप की हिस्ट्री में जाकर देखा तो चार जनवरी को अनीता के नाम पर एक नंबर से रुपये भेजे गए मिले।
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घर के बाहर पुलिस टीम भी मौजूद रही
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजन और बेटों का कहना है कि उन्हें न अनीता के बारे में जानकारी है और न ही जिसने उनसे रुपये भेजने के लिए कहा था, उसकी जानकारी है। एजेंसी का मानना है कि आखिर ऐसा क्या संयोग बना होगा कि पिता बैंकॉक से हुंडी का काम करते हैं और बेटों के नंबर से पाकिस्तान को सूचनाएं देने वाले के पास 15 हजार रुपये भेज दिए गए।
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एनआईए की टीम
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जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली से हुई गिरफ्तारी के बाद अनीता का नाम सामने आना और गोरखपुर से जुड़ाव ये महज एक संयोग नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए कि दिल्ली से गिरफ्तार आरोपी के खाते में सूचना भेजे जाने वाले महीने की 4 तारीख को ही रुपये भेजे जाते थे। ऐसे ही, पन्नेलाल यादव के बेटे के नंबर से अनीता के खाते में भी 4 जनवरी को ही रुपये भेजे गए थे।
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एनआईए की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे में टीम को आशंका है कि ये अनीता और गिरफ्तार आरोपी दोनों के बीच किसी न किसी तरह का सीधा जुड़ाव है। जनवरी महीने में सीधे पाकिस्तान से रुपये न भेजकर अनीता के खाते में भारतीय खाते से ही रुपये भेजे गए थे। ऐसे में ये चार तारीख बेहद खास है। एजेंसी इसका गणित भी समझने की प्रयास कर रही है।
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जांच के बीच फोन पर किसी से बातचीत करता बेटा
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रामगढ़ताल थाने पर सीज हुआ मोबाइल
दोपहर लगभग तीन बजे करीब एनआईए की टीम रामगढ़ताल थाने पहुंची थी। वहीं से अमन की बहन के नंबर पर टीम ने फोन किया। अमन को रामगढ़ताल थाने पर बुलाया। बहनों ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। परिवार का एक सदस्य अपने साथ अमन को लेकर थाने पहुंचा। वहां टीम ने उससे जांच के प्रपत्रों पर हस्ताक्षर करवाया।
इस दौरान थाने की तरफ से गवाही बनी। थाने पर अमन के फोन को जब्त कर सीज करते हुए टीम अपने साथ लेते गई। जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि टीम मोबाइल फोन से फॉरेंसिक परीक्षण करवाकर उसके चैट और ऑनलाइन लेन-देन की हिस्ट्री भी परखेगी।
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पन्नेलाल यादव के भाई को साथ ले जाती टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
पन्नेलाल की बेटी और बेटों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसके मुताबिक, बेटी ने अनीता को दीदी बोलते हुए अपनी बात कही। कहा कि अनीता दीदी को रुपये भेजे थे। हालांकि ये बोलने के बाद संकोच करते और पीछे की तरफ देखते भी दिखी। इसी के ठीक बाद बगल में खड़ी दूसरी बेटी अनीता और रुपये भेजे जाने को लेकर अपनी बात कहते दिखी।
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घर के अंदर पूछताछ करती एनआईए की टीम
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नाम अनीता, लेकिन पहचान कुछ और तो नहीं
जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो अभी तक की जांच में सभी कड़ियां धीरे-धीरे मिल रही हैं। लेकिन, जिस अनीता के खाते में पाक से रुपये आए और गोरखपुर से भी रुपये भेजे जाने की जांच चल रही है, वह अभी तक एजेंसी की पकड़ से बाहर है। ऐसे में आशंका है कि संभवत नाम अनीता का हो और उसकी पहचान दूसरी हो। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी इस बिंदु पर भी काम कर रही है।
घर के बाहर पुलिस टीम भी मौजूद रही
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शहर में सबसे पहले राजघाट थाने पहुंची थी टीम
एनएआई की टीम दो दिन पहले सुबह साढ़े तीन से चार बजे करीब सबसे पहले राजघाट थाने पर पहुंची थी। वहां एक पते को लेकर थाने से कंफर्म करवाया। राजघाट थानाक्षेत्र में नहीं होने की जानकारी पर टीम सीधे तारामंडल बुद्धा विहार पार्ट ए पहुंची थी।