पवित्र नदी नारायणी जिसे हम गंडक के नाम से भी जानते हैं। यहां श्राप के कारण भगवान विष्णु (ठाकुर जी) पत्थर के रूप में रहते हैं। श्राप के प्रभाव से पत्थर रूपी भगवान को कीड़े कुतर भी देते हैं। इसकी कहानी बहुत दिलचस्प है। हिमालय से निकलकर नेपाल के रास्ते उत्तर प्रदेश के कुशीनगर होकर पटना बिहार के पास गंगा में समाहित होने वाली नारायणी को पुराणों ग्रंथों में काफी पवित्र बताया गया है। हिमालय पर्वत श्रृंखला के धौलागिरि पर्वत के मुक्तिधाम से निकली गंडक नदी गंगा की सप्तधारा में से एक है। नदी तिब्बत व नेपाल से निकलकर उत्तर प्रदेश के महराजगंज, कुशीनगर होते हुए बिहार के सोनपुर के पास गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी को बड़ी गंडक, गंडकी, शालिग्रामी, नारायणी, सप्तगंडकी आदि नामों से जाना जाता है। नदी के 1310 किलोमीटर लंबे सफर में तमाम धार्मिक स्थल हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...