premchand
- फोटो : अमर उजाला।
रेती पर के बुकसेलर बुद्धिलाल की दुकान थी उनकी पसंदीदा ठौर
तिलस्मी और ऐय्यारी पुस्तकों को पढ़ने के लिए मुंशी प्रेमचंद अक्सर रेती पर स्थित एक बुक सेलर बुद्धि लाल की दुकान पर घंटों बिताया करते थे। यह उनकी पसंदीदा ठौर (अड्डा) थी। अपनी एक पुस्तक में मुंशी प्रेमचंद्र ने जिक्र करते हुए लिखा है कि 'रेती पर एक बुकसेलर बुद्धिलाल नाम का रहता था। मैं उसकी दुकान पर जा बैठता था और उसके स्टाक के उपन्यास ले-लेकर पढ़ता था। मगर दुकान पर सारे दिन तो बैठ न सकता था, इसलिए मैं उसकी दुकान से अंग्रेजी पुस्तकों की कुंजियां और नोट्स लेकर अपने स्कूल के लड़कों के हाथ बेचा करता था और उसके मुआवजे में दुकान से उपन्यास घर लाकर पढ़ता था। दो-तीन वर्षों में मैंने सैकड़ों उपन्यास पढ़ डाले होंगे।'