भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में पुरामहत्व के जिन अवशेषों को दिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट समेत तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं, उनके संरक्षण का ध्यान किसी को नहीं है। मुख्य मंदिर, रामाभार स्तूप व माथा कुंवर मंदिर के आसपास बरसात में हुए जलभराव में कुछ स्तूप समेत कई निर्माण करीब चार महीने तक डूबे रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी लंबी अवधि तक पानी में लगातार डूबे रहने से ढाई हजार साल पुराने ये अवशेष धीरे-धीरे नष्ट हो जाएंगे।