आज महंत अवैद्यनाथ की जयंती मनाई जा रही है। ऐसे में हम आपको उनकी एक खास कहानी बताने जा रहे हैं। यहां सन् 1977 की है, जब विधानसभा चुनाव जीतने के बाद गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने यह घोषणा इसलिए की क्योंकि दक्षिण भारत के मंदिरों में दलितों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। मीनाक्षीपुरम मंदिर में दलितों के प्रवेश पर रोक लगने के विरोध में महंत अवैद्यनाथ दक्षिण भारत पहुंच गए। वहां के पुजारियों और महंतों से मुलाकात कर कहा कि हिंदुओं से भेदभाव ठीक नहीं है अगर हिंदू मंदिर नहीं आएगा तो संतो को कौन पूछेगा?
उन्होंने मीनाक्षीपुरम मंदिर में तबतक धरना दिया, जबतक संतों ने आश्वासन नहीं दिया कि मंदिर में किसी का प्रवेश वर्जित नहीं रहेगा। इसी बीच महंत अवैद्यनाथ काशी पहुंचे और डोम राजा से मुलाकात की। डोम राजा ने कहा कि हम तब मानेंगे जब संत आकर हमारे घर भोजन करेंगे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...