शिवरात्रि पर लगभग दो लाख शिवभक्त करते हैं बाबा का जलाभिषेक।
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झारखंडी महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी शंभु गिरी गोस्वामी ने बताया कि पहले यहां पर चारों तरफ जंगल था। लकड़हारे यहां से लकड़ी काटकर ले जाते थे और अपना जीवकोपार्जन करते थे। पुराने लोग बताते हैं कि 1928 में एक दिन एक लकड़हारा यहां पर पेड़ काट रहा था, तभी उसकी कुल्हाड़ी एक पत्थर से टकराई जिससे खून की धारा बहने लगी। इसके बाद वह लकड़हारा जितनी बार उस शिवलिंग को ऊपर लाने की कोशिश करता वो उतना ही नीचे धंसता जाता।