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आस्था: श्रीवत्स व शिव योग से खास बनेगी शिवरात्रि, शिवालयों में उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब

Wed, 10 Mar 2021 12:36 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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महाशिवरात्रि - फोटो : अमर उजाला।
भगवान शिव की उपासना का पर्व महाशिवरात्रि 11 मार्च को कई शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। शहर के शिवालयों के भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस साल शिवरात्रि पर ग्रह और नक्षत्रों के अद्भुत संयोग बन रहे हैं।

 
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महाशिवरात्रि - फोटो : अमर उजाला।
शिवरात्रि के पूर्व दिन से प्रारंभ होकर धनिष्ठा नक्षत्र इस दिन रात 9 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इसी तरह सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक शिव योग, इसके बाद सिद्ध योग विद्यमान है। सूर्योदय के समय धनिष्ठा होने से श्रीवत्स नामक महाऔदायिक योग निर्मित हो रहा है। श्रीवत्स और शिव योग होने से इस दिन के पूजन-अर्चन और व्रत से करने से श्रद्धालु को सर्वविद्ध शुभता की प्राप्ति होगी।

 
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
व्रत का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहते है। धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। जो व्यक्ति शिवरात्रि को निर्जला व्रत रहकर जागरण और रात्रि के चारों प्रहरों में चार बार पूजा करता है, वह शिवसायुज्य को प्राप्त करता है। शिवरात्रि माहात्म्य में लिखा है कि शिवरात्रि से बढ़कर कोई दूसरा व्रत नहीं है।

 

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ज्योतिष पं. शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
ऐसे करें पूजन-अर्चन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें। व्रत रखकर किसी शिवमंदिर या अपने घर में नर्मदेश्वर की मूर्ति अथवा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर समस्त पूजन सामग्री एकत्र कर आसन पर विराजमान होकर ‘मम इह जन्मनि जन्मान्तरेवार्जित सकल पाप क्षयार्थं आयु-आरोग्य-ऐश्वर्य-पुत्र-पौत्रादि सकल कामना सिद्धिपूर्वक अन्ते शिवसायुज्य प्राप्तये शिवरात्रिव्रत साड्गता सिध्यर्थं साम्बसदाशिव पूजनम करिष्ये।’ मंत्र के साथ संकल्प कर नर्मदेश्वर या स्थापित शिवमूर्ति की षोडशोपचार पूजा करें। आक, कनेर, विल्वपत्र और मौलसिरी धतूरा, कटेली आदि अर्पित करें।

 
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भगवान शिव की प्रतिमा। - फोटो : अमर उजाला।
रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र, शिव संबंधित अन्य धार्मिक कथा सुनें। रुद्रभिषेक करा सकें, तो अत्युत्तम है। रात्रि जागरण कर दूसरे दिन प्रात:काल शिवपूजा के पश्चात जौ, तिल और खीर से 108 आहुतियों ‘त्र्यम्बकं यजामहे’ या ‘ऊं नम: शिवाय’ आदि मंत्रों से यज्ञशाला में दें। ब्राह्मणों या शिवभक्तों को खीर या भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें फिर स्वयं भोजन कर व्रत का पारण करें।
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