बाएं आंचल श्रीवास्तव, दाएं बबिता।
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बशारतपुर की निवासी बबिता ने बताया कि वट सावित्री व्रत करने के लिए हर साल वट वृक्ष की तलाश करनी पड़ती है। पहले असुरन चौक स्थित बरगद के पेड़ की पूजा करने जाती थी, लेकिन फोरलेन निर्माण के कारण वह काट दिया गया। अब हर साल नई जगह पर बरगद के पेड़ की तलाश न करनी पड़े, इसके लिए अब खुद बरगद का पौधा लगाऊंगी।
राप्तीनगर निवासी आंचल श्रीवास्तव ने बताया कि वट सावित्री व्रत के दिन घर से चार किलोमीटर दूर पूजा करने के लिए जाना पड़ता था, लेकिन इस बार वह पेड़ भी कट चुका है। पति से कई जगहों पर बरगद के पेड़ की तलाश कराई लेकिन पेड़ नहीं मिला। ऐसें में बरगद का पौधा खरीदकर लाई हूं। इसी की पूजा की हूं।