गोरखपुर में आज युनाइटेड सिनेमा हॉल में भोजपुरी फिल्म अनाड़ी ऑटोवाला का प्रीमियर हुआ। जिसके निर्माता अजीत शुक्ला व निर्देशक जेम्स पार्कर हैं। वहीं गोरखपुर विश्वविद्यालय में विज्ञान दिवस पर के प्राणी विज्ञान विभाग में संगोष्ठी की गई।
वहीं समाजशास्त्र, यूजीसी की ओर से आयोजित 14 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का समापन हुआ। वहीं रॉयल रेजीडेंसी में आईडीए की ओर से यूपी डेंटल शो 2020 का आयोजन किया गया। शाम को आर्यनगर स्थित संतोषी माता मंदिर में विशेष पूजन अर्चन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिला अस्पताल के प्रेरणा सभागार में शुक्रवार को शार्ट फिल्म ‘डेरवा’ के जरिए पीएचसी की सुविधाएं बताई गईं। फिल्म में योगदान देने वाले 126 नायकों को इस मौके पर अपर मुख्य निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जनार्दन मणि त्रिपाठी और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने सम्मानित किया।
डॉ. जनार्दन मणि त्रिपाठी ने बताया कि डेरवा पीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह शार्ट फिल्म तैयार किया गया है। इस फिल्म के जरिए पीएचसी की सुविधाएं जानी जा सकती हैं। नेशनल क्वालिटी एंश्योरेंस स्टैंडर्ड प्रमाण पत्र पाने वाली पहली पीएचसी डेरवा है। डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि डेरवा की सफलता के पीछे टॉप टू बॉटम का योगदान है। एसीएमओ डॉ नंद कुमार ने कहा कि प्रयास किया जाएगा कि डेरवा फिल्म राज्य स्तर पर भी प्रदर्शित करवाई जाए।
11 मिनट के फिल्म का निर्देशन शुभम पांडेय ने किया। मुख्य भूमिका में अश्विनी, आलोक और डॉ. मुस्तफा खान रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एनके पांडेय और संचालन डॉ. मुस्तफा खान ने किया। इस मौके पर डीटीओ रामेश्वर मिश्रा, डीएलओ डॉ. एके प्रसाद, बड़हलगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. वीके राय, डॉ. विराट स्वरूप, डॉ. सागर घोड़ेकर, डॉ. एके पांडेय, केएन बरनवाल, डॉ. अर्चना, उपेंद्र मणि तिवारी, डॉ. अमित शाही, दिलीप गोविंद राव, धर्मवीर, नीतू राय, बदरे आलम, भोला गुप्ता आदि को सम्मानित किया गया।
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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: प्रतिभा के बूते बने ‘नन्हें कलाम’
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से नन्हा कलाम प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला शुक्रवार को वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में हुआ। जहां प्रतिभागी विद्यार्थियों के बौद्धिक क्षमता और माडल प्रदर्शनी के दम पर 20 मेधावियों को नन्हा कलाम की उपाधि प्रदान की गई। इस दौरान सीनियर और जुनियर वर्ग में प्रथम स्थान हासिल करने वाले मेधावी को 21-21 हजार रुपये, द्वितीय स्थान को 11-11 हजार और तृतीय स्थान को 5100- 5100 रुपये नकद पुरस्कार सहित प्रमाण पत्र और मेडल प्रदान किया गया।
जूनियर वर्ग में जहां पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से तीन- तीन मेधावियों ने कब्जा जमाया। वहीं सीनियर वर्ग में तीनों स्थानों पर दो-दो मेधावियों ने जगह बनाई। मुख्य अतिथि अपर आयुक्त रतिभान ने कहा कि आधुनिक तकनीक की खोज होने से देश की समृद्धि होती है। तब हम तेजी से विकास करते हैं। विद्यार्थियों ने अपने अपने मॉडलों के माध्यम से आधुनिक भारत की तस्वीर पेश करते हुए अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का परिचय दिया है। विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार मिश्र ने कहा कि अविष्कार के लिए संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती है।
वैज्ञानिक गुण अपने आप ही विकसित होते हैं। वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि नन्हा कलाम प्रतियोगिता के तहत विभिन्न चरणों में प्रतियोगिताओं का आयोजन ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक हुआ है। विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से 140 मेधावियों आखिरी चरण की प्रतियोगिता में प्रवेश किया। जहां 20 को नकद पुरस्कार शेष को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में वेद पांडेय, सुरेश कुमार, आशोक कुमार मिश्र, अमर पाल सिंह, पप्पूलाल आदि का सराहनीय योगदान रहा।
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gorakhpur polic
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार की नमाज को लेकर एएसपी विकास व कोतवाली सीओ वीपी सिंह घंटाघर में गस्त करते हुए।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के पांच विभागों में शोध के लिए पंजीकृत तृतीय श्रेणी के विद्यार्थियों का मामला उलझ गया है। पंजीकरण के समय विद्यार्थियों के अंक पत्र नहीं जांचे गए। अब, जबकि मामला पकड़ में आया है तो विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों का पंजीकरण निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसके विरोध में आठ शोधार्थियों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के सामने धरना दिया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा। कुलपति ने तीन मार्च को होने वाली अकादमिक कौंसिल की बैठक में मामला रखने का निर्णय लिया है। इसे भी पढ़ें... गोविवि: शोध पंजीकरण निरस्त करने के निर्णय पर भड़के छात्र, धरने पर बैठे
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने कहा कि मानव समाज के अस्तित्व की निरंतरता के लिए सामाजिक संबंधों का जीवंत रहना अत्यंत आवश्यक है। सामाजिक संबंधों में संघर्ष और तनाव के स्थान पर सहयोग की भावना को बढ़ाने से ही कोई समृद्ध राष्ट्र अविच्छिन्न (अखंड) बना रह सकता है।
वह शुक्रवार को समाजशास्त्र विभाग और यूजीसी एचआरडी सेंटर, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की ओर से ‘रीसेंट ट्रेंड्स इन सोशल साइंसेज, पर्सपेक्टिव्स एंड मेथड्स’ विषय पर आयोजित 14 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के समापन सत्र के दौरान विचार व्यक्त कर रहे थे। प्रो. चौहान ने कहा कि समाजशास्त्र को समस्याएं दूर करने के साथ इस पर भी विचार करना होगा कि संस्कार का निर्माण कैसे हो।
उन्होंने कहा कि देश और समाज के समक्ष अनेकों चुनौतियां हैं, जो नकारात्मक पैराडाइम का रूप ग्रहण कर ले रही हैं। इससे हटकर सकारात्मक सोच की ओर समाज को ले जाना होगा। सकारात्मकता और सामूहिकता से ही समाज में आमूल परिवर्तन हो सकता है। अध्यक्षता करते हुए गोविवि के कुलपति के प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने कहा कि कभी भी ज्ञान का अभिमान नहीं होना चाहिए।
एक शिक्षक का यह उत्तरदायित्व है कि वह ज्ञान को अधिकतम विस्तार प्रदान करे। कोआर्डिनेटर प्रो. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कार्यक्रम में कोशिश की गई कि सभी प्रतिभागियों का देश के उत्कृष्ट और नामचीन विद्वानों से साक्षात्कार हो। एचआरडी सेंटर के निदेशक प्रो. हिमांशु पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। आभार ज्ञापन अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. डीएन यादव एवं संचालन सह समन्वयक डॉ. मनीष पांडेय ने किया। इस अवसर पर प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव, प्रो. रामप्रकाश, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. अजय कुमार शुक्ला, प्रो. रविशंकर सिंह आदि मौजूद रहे।