ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय।
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पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि कुश से बने आसन पर बैठ कर साधना करने से आरोग्य, यश और तेज की वृद्धि होती है। साधक की एकाग्रता भंग नहीं होती। कुश मूल की माला से जाप करने से अंगुलियों के एक्यूप्रेशर बिंदु दबते रहते हैं, जिससे शरीर में रक्त संचार ठीक रहता है। भाद्रपद कृष्ण अमावस्या को लाई गई कुशावर्ष भर तक पवित्र रहती है। देव पूजन, यज्ञ, हवन, यज्ञोपवीत, ग्रहशांति पूजन कार्यो में रुद्र कलश एवं वरुण कलश में जल भर कर सर्वप्रथम कुश डालते हैं। कलश में कुश डालने का वैज्ञानिक पक्ष यह है कि कलश में भरा हुआ जल लंबे समय तक जीवाणु से मुक्त रहता है।